भोपाल , दिसंबर 6 -- मध्यप्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री एवं कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर कहा है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश का किसान उत्पादन लागत, बाजार भाव, बीमा सुरक्षा और संस्थागत व्यवस्था चारों मोर्चों पर अकेला पड़ गया है। उन्होंने इसे सरकार की विफलता नहीं बल्कि सोची-समझी किसान विरोधी नीति करार दिया।
सचिन यादव ने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में किसानों को सुरक्षा, सम्मान और स्थिरता मिली थी। जय किसान ऋण मुक्ति योजना के तहत 27 लाख किसानों का 11 हजार 500 करोड़ रुपये का फसल ऋण माफ किया गया, 10 एचपी तक बिजली बिल आधा किया गया और मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना से किसानों को उचित मूल्य मिला। नकली खाद-बीज पर सख्त कार्रवाई, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी बढ़ाने और गौशालाओं के निर्माण से किसानों को राहत दी गई थी। उन्होंने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को भी सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को 10 घंटे बिजली, सोयाबीन की एमएसपी पर खरीदी और गेहूं-धान के ऊंचे दाम देने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती है। वर्ष 2025 में सोयाबीन की सरकारी खरीदी बंद कर दी गई, भावांतर जैसी योजनाओं से किसानों को नुकसान हुआ और गेहूं-धान के घोषित भाव पर खरीदी की कोई गारंटी नहीं है।
फसलवार स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मूंग खरीदी में पहले इनकार किया गया और बाद में भुगतान में देरी हुई। मक्का एमएसपी से काफी नीचे बिक रहा है, जबकि राज्य सरकार ने खरीदी का प्रस्ताव तक नहीं भेजा। कपास खरीदी में सीसीआई की नीतियों से किसान परेशान हैं। प्याज किसानों को दो रुपये किलो तक भाव नहीं मिल रहा, जबकि भाजपा के पास कोई ठोस नीति नहीं है। केले को फसल बीमा से बाहर रखकर बुरहानपुर के किसानों के साथ अन्याय किया गया।
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