चेन्नई , जनवरी 26 -- मद्रास उच्च न्यायालय मंगलवार को अभिनेता से नेता बने और तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के संस्थापक विजय की फिल्म 'जनानायगन' पर फैसला सुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को यू/ए प्रमाण पत्र देने का निर्देश देने वाले जज के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर दोनों पक्षों की दिनभर की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुण मुरुगन की पीठ ने 20 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन ने सीबीएफसी की ओर से और वरिष्ठ वकील सतीश परासरन की मदद विजयन सुब्रमण्यम ने की। उन्होंने फिल्म निर्माताओं केवीएन प्रोडक्शंस के लिए बहस की। पीठ ने फिल्म निर्माता के अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह उसी दिन आदेश पारित नहीं कर सकती। उसने हालांकि कोई तारीख तय किए बिना अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत कल सुबह अपना फैसला सुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह फिल्म पोंगल त्योहार के हिस्से के रूप में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी लेकिन सीबीएफसी से सेंसरशिप सर्टिफिकेशन मिलने में देरी के कारण फिल्म कानूनी पचड़ों में फंस गई।
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