नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इम्फाल सब-जोन द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत सलाइ ग्रुप ऑफ कंपनीज़ से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मामले में इम्फाल के पाँच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
ईडी के अनुसार यह मामला वर्ष 2019 में लंदन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जहाँ याम्बेम बीरेन - जिन्होंने स्वयं को "मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री" बताया और नारेंगबाम समरजीत जिन्होंने खुद को "मणिपुर स्टेट काउंसिल का विदेश एवं रक्षा मंत्री" बताया था। उन्होंने भारत से मणिपुर की स्वतंत्रता का दावा किया था।
इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के माध्यम से आरोपियों पर राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह तथा विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य, शत्रुता और घृणा फैलाने जैसे अपराधों में संलिप्त होने का आरोप है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज कर चुकी हैं। आरोपियों ने वर्ष 2003 में कदांगबंद स्वजलधारा इम्प्लीमेंटेशन कमेटी का गठन किया था, जिसे 10 अगस्त 2008 को 'स्मार्ट सोसाइटी' नाम दिया गया। इसके अलावा उन्होंने सलाइ फाइनेंशियल सर्विस (एसएएफएफआईएनएस) की स्थापना की, जिसे बॉम्बे मनी लेंडर्स अधिनियम , 1946 (मणिपुर में लागू) के तहत लाइसेंस प्राप्त था।
आरोप है कि सलाइ ग्रुप की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से आरोपियों ने जनता से धोखाधड़ी कर और बिना वैध अधिकार के नकद धन एकत्र किया, जिसमें अत्यधिक ब्याज दरों का लालच दिया गया। स्मार्ट सोसाइटी ने "सदस्यता शुल्क" के नाम पर केवल नकद में जमा स्वीकार कर और केवल नकद में ब्याज वितरित कर अवैध रूप से एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में काम किया। विभिन्न योजनाओं के तहत भोले-भाले निवेशकों से कुल 57.36 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। जनता से एकत्र की गई राशि को निदेशकों के व्यक्तिगत बैंक खातों के साथ-साथ सलाइ ग्रुप ऑफ कंपनीज़ और स्मार्ट सोसाइटी के खातों में जमा कराया गया।
पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1)(यू) के तहत परिभाषित आपराधिक गतिविधियों से आरोपियों और संबंधित संस्थाओं ने 57.36 करोड़ रुपये की अपराध-आय अर्जित की। इन धनराशियों को विभिन्न सलाइ ग्रुप कंपनियों और आरोपियों के व्यक्तिगत खातों में भेजकर संपत्तियाँ खरीदने, होम लोन, वाहन ऋण, टर्म लोन चुकाने तथा अन्य खर्चों में उपयोग किया गया। आरोप है कि इसी धन का उपयोग केन्द्र सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह तथा समूहों के बीच वैमनस्य और घृणा फैलाने की गतिविधियों में भी किया गया।
जांच अभी जारी है और अब तक अचल संपत्तियों में निवेश से संबंधित विवरण तथा आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
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