इम्फाल , दिसंबर 27 -- मणिपुर के इम्फाल में शनिवार को आयोजित राजनीतिक दलों के एक सम्मेलन में राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया से पहले उचित जनगणना कराने की मांग उठी।

इम्फाल के लाम्यानबा शांगलेन में आयोजित इस बैठक में मणिपुर के सामने पेश आ रही समस्याओं के बारे में चर्चा की गयी।

इस सम्मेलन का आयोजन कैंप्पेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) ने था, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। आरआईएमएस के पूर्व प्रोफेसर एवं प्रख्यात जनसांख्यिकीविद् आर.के.नरेंद्र ने सत्र का संचालन किया। जेएफडी के संयोजक जीतेंद्र निंगोबा ने बैठक की अध्यक्षता की।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए कि मणिपुर में 2027 में कोई अंतरिम या आंशिक जनगणना नहीं होनी चाहिए और राज्य में शांति और स्थिरता पूरी तरह बहाल होने के बाद ही अखिल भारतीय जनगणना की जानी चाहिए, ताकि मणिपुर की जनसांख्यिकीय वास्तविकता का सटीक आकलन किया जा सके। प्रतिभागियों ने कहा कि अतीत में जनसंख्या के गलत आंकड़ों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को विकृत किया है और समुदायों के बीच अविश्वास को गहरा किया है।

सम्मेलन में कहा गया कि मणिपुर में परिसीमन की प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से नहीं की जानी चाहिए, बल्कि अगली जनगणना के बाद होने वाली राष्ट्रव्यापी परिसीमन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में ही की जानी चाहिए। प्रतिभागियों ने बताया कि यह रुख मार्च और मई 2025 के बीच मणिपुर में राजनीतिक दलों के रुख के अनुरूप है।

सभी दलों ने कहा कि मौजूदा जातीय तनाव के बीच, खासतौर से 2001 के विवादित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से समुदायों का और भी ज्यादा ध्रुवीकरण हो सकता है और राज्य की पहले से ही नाजुक स्थिति और भी अधिक अस्थिर हो सकती है।

जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा तीन का हवाला देते हुए वक्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया गया कि जब तक प्रमुख शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक 2027 में मणिपुर में जनगणना के लिए कोई अधिसूचना जारी न करें या विशेष जनगणना न करायी जाय। इन शर्तों में शांति की बहाली, आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास का पूरा होना, सामान्य नागरिक प्रशासन की वापसी और एनआरसी या किसी समकक्ष प्रक्रिया के माध्यम से अवैध अप्रवासियों की पहचान के लिए एक विश्वसनीय तंत्र की स्थापना करना शामिल है।

राजनीतिक दलों ने विवादित जनगणना आंकड़ों से जुड़े किसी भी परिसीमन अभ्यास को स्थगित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने सहित राजनीतिक और कानूनी साधनों के माध्यम से केंद्र सरकार पर सामूहिक दबाव डालने का संकल्प लिया।

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