इंफाल , मार्च 22 -- मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने रविवार को कहा कि राज्य में शांति बहाल करने के लिए आपसी विश्वास सबसे जरूरी शर्त है। उन्होंने कहा कि आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को हर समय सुरक्षा प्रदान करना संभव नहीं है, इसलिए विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और भरोसे का पुल बनाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह शनिवार को असम गए थे, जहां उन्होंने 03 मई 2023 से शुरू हुए संकट के बाद पहली बार कुकी समुदाय के कुछ लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मणिपुर में कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना जरूरी है, ताकि सभी समुदाय शांति से रह सकें।
मुख्यमंत्री खुमन लंपक स्थित अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मौजूद हैं। साथ ही, पहले अवरुद्ध रहा इंफाल-उखरूल मार्ग अब खोल दिया गया है। यह मार्ग कुकी संगठनों द्वारा मैतेई और नागा समुदायों की आवाजाही रोकने के लिए बंद किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारे राज्य में 36 विभिन्न समुदाय रहते हैं और मणिपुर की एकता बनी रहेगी। बेहतर भविष्य के लिए हमें अतीत को भूलकर आगे बढ़ना होगा।"स्वायत्तता की मांग से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा, इसलिए इस मुद्दे पर अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (इंफाल-कोहिमा रोड) पर लोगों की आवाजाही के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अब यात्रा कर रहे हैं, लेकिन संख्या कम है। उन्होंने माना कि दोनों समुदायों के बीच विश्वास की कमी के कारण लोगों में अभी भी डर बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि इंफाल-उखरूल मार्ग पर कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। साथ ही, आईएसबीटी के निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि यह बस टर्मिनल लंबे समय से बंद था, लेकिन मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के मार्गदर्शन में इसे फिर से चालू किया गया है।
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