भुवनेश्वर , मई 02 -- ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले का भितरकनिका नेशनल पार्क मगरमच्छों के प्रजनन और घोंसला बनाने के मौसम के दौरान 1 मई से 31 जुलाई तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा।
भितरकनिका नेशनल पार्क के सहायक मुख्य संरक्षक (एसीएफ) मानस दास ने बताया कि यह प्रतिबंध इसलिए जरूरी है ताकि मगरमच्छों को उनके घोंसला बनाने और प्रजनन के समय पर्यटकों से कोई परेशानी नहीं हो।
पर्यटकों और वन अधिकारियों को ले जाने वाली मशीनी नावों की आवाज से भी मगरमच्छों को परेशानी होती है। अगर घोंसला बनाने और प्रजनन के समय इन सरीसृपों को परेशान किया जाए, तो वे अधिक हिंसक हो जाते हैं और अधिकतर मगरमच्छों के हमले घोंसला बनाने के मौसम में ही होते हैं।
मादा मगरमच्छें पार्क के जल-क्षेत्रों के पास मैंग्रोव जंगलों के अंदर अंडे देती हैं और जब तक अंडों से बच्चे बाहर नहीं आ जाते, तब तक वे उनकी रखवाली करती हैं। वन रक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे मादा मगरमच्छों की हरकतों पर नजर रखें।
नेशनल पार्क की सीमा के आस-पास रहने वाले लोग अक्सर शहद और जलाने वाली लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जंगल में घुस जाते हैं, जिसके कारण मगरमच्छ परेशान हो जाते हैं और अपनी रक्षा के लिए वे इंसानों पर हमला कर देते हैं।
वन अधिकारी ने बताया कि चूंकि घोंसला बनाने के समय मादा मगरमच्छें हिंसक हो जाती हैं, इसलिए कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मैंग्रोव जंगलों और आर्द्रभूमि वाले इलाकों में बने घोंसलों का पता लगाएं।
देश में खारे पानी के मगरमच्छों के संरक्षण के लिए मशहूर इस पार्क में अधिकारियों की लगातार कोशिशों की बदौलत मगरमच्छों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 1974 में जहां इनकी संख्या 100 से भी कम थी, वहीं जनवरी 2026 में हुई जनगणना के अनुसार अब इनकी संख्या बढ़कर 1858 हो गई है।
ओडिशा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां तीनों प्रजातियों के मगरमच्छ-घड़ियाल, मगर और खारे पानी के मगरमच्छ जंगली परिवेश में पाए जाते हैं।
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