वाराणसी , दिसंबर 18 -- धार्मिक नगरी काशी में इन दिनों नगर निगम द्वारा मंदिरों और मठों पर कर लगाने का मामला सुर्खियों में है। गुरुवार को नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी त्रुटि के कारण नोटिस जारी हुआ होगा, जिसको सुधारा जा रहा है। किसी भी उपासना स्थल, मंदिर और मठ पर गृहकर शून्य रहेगा। कोई भी कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है।

जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि मंदिरों और मठों पर लगने वाले कर को लेकर नगर आयुक्त की ओर से स्पष्टीकरण दे दिया गया है। शासन के निर्देश पर पहली बार संपत्ति कर का यूनिफाइड बिलिंग जनरेट किया जा रहा है, जिसमें गृहकर, जलकर और सीवर कर का एकीकृत बिल है। यह प्रक्रिया पूरे वाराणसी शहर के लिए की जा रही है। वित्तीय वर्ष में चार माह शेष बचे हैं। बीस हजार से ज्यादा भवनों के बकाए को लेकर उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। सात तारीख को एक मंदिर-मठ द्वारा इस पर आपत्ति जाहिर की गई। नगर निगम द्वारा तत्काल जांच कराकर गृहकर मुक्त कर दिया गया।

नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 175 और 177 में वर्णित है कि किसी भी उपासना स्थल का गृहकर माफ किया जा सकता है लेकिन सीवर कर और जलकर से मुक्त नहीं होता है। हालांकि अब जलकर और सीवर कर में भी पचास प्रतिशत की कमी की जाएगी।

प्रथम चरण में कोतवाली जोन, जहां का मामला सामने आया था, जब चालीस मंदिर-मठ, सात मस्जिद और एक गुरुद्वारे को गृहकर से मुक्त कर दिया गया है। नगर निगम अधिनियम में जलकर और सीवर कर मुक्त करने का वर्णन नहीं है, लेकिन उसे पचास प्रतिशत किया जा रहा है।

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