रायगढ़ , फरवरी 12 -- छत्तीसगढ़ में रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र स्थित मंगल कार्बन प्लांट में हुए भीषण हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। नौ माह की मासूम बच्ची, उसके पिता और दादा की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने गुरुवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। लगभग चार घंटे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।
बताया जा रहा है कि पांच फरवरी को बानीपाथर स्थित प्लांट में काम के दौरान फर्नेस से अचानक तेज आग और प्रेशर बाहर निकलने से आठ मजदूर झुलस गए थे। घायलों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल थे। गंभीर रूप से झुलसी नौ माह की भूमि खड़िया ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। देर रात उसके पिता शिव खड़िया की भी मौत हो गई, जबकि बुधवार दोपहर वेंटिलेटर पर उपचाररत साहेबलाल खड़िया ने भी अंतिम सांस ली। अन्य घायलों का इलाज रायपुर में जारी है।
परिजनों के अनुसार आर्थिक तंगी के कारण पति-पत्नी दोनों प्लांट में मजदूरी करते थे और छोटे बच्चों को भी साथ ले जाते थे। हादसे के दिन भी बच्ची को पास में लिटाकर काम किया जा रहा था। आरोप है कि फर्नेस को पर्याप्त ठंडा किए बिना खोला गया और मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे यह दुर्घटना हुई।
रिश्तेदारों का कहना है कि तीन महीने पहले परिवार की तीन वर्षीय बच्ची की भी तबीयत बिगड़ने से मौत हो चुकी थी। लगातार दो संतानों और परिवार के कमाऊ सदस्यों की मौत से घर में मातम पसरा है। अस्पताल में भर्ती उदासिनी खड़िया का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है।
आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने मृतकों के लिए प्रति व्यक्ति 50 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, घायलों के संपूर्ण इलाज का खर्च कंपनी से वहन कराने, प्लांट प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई और न्यायिक जांच की मांग की। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन की ओर से एफआईआर वापस लेने और बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।
हादसे में झुलसे अन्य मजदूरों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। सभी का उपचार राजधानी के अस्पताल में जारी है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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