चंडीगढ़ , दिसंबर 09 -- पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि चार दिन बीत जाने के बाद भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से यह स्पष्ट करने के लिए कोई बयान सामने नहीं आया कि यह पैसा कहाँ जाता है।
श्री चीमा ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह चन्नी, संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा की इस मुद्दे पर हैरान करने वाली चुप्पी पर भी निशाना साधा।
वित्त मंत्री ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को अपने दफ़्तर के बाहर एक बोर्ड लगाना चाहिए, जिस पर पदों के हिसाब से रेट लिस्ट लिखी हो। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ द्वारा लगाए गए उस आरोप का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि चरणजीत सिंह चन्नी ने 350 करोड़ रुपये में मुख्यमंत्री का पद हासिल किया था।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के उस बयान, जिसमें उन्होंने नवजोत कौर सिद्धू को मनोवैज्ञानिक इलाज कराने की सलाह दी थी, की कड़ी आलोचना करते हुए वित्त मंत्री ने डॉ. सिद्धू के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि कैंसर से अपनी जंग जीतने के बाद अब वह पंजाब के लोगों के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इलाज की ज़रूरत उनको नहीं, बल्कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेतृत्व को है।
कांग्रेस के भ्रष्टाचार की एक और घटना का उल्लेख करते हुए श्री चीमा ने मीडिया को 10 दिसंबर 2021 को पंजाब भवन में दो मंत्रियों के बीच हुई लड़ाई की याद दिलाई, जिसमें तबादलों में किए गए भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था। उन्होंने कहा कि यही कांग्रेस नेता आज भी पार्टी में विधायक और सांसद के रूप में सेवा कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के माध्यम से पद हासिल करने वाले दो नेता अब भाजपा में हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। भाजपा की ईमानदारी के दावों को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं को तत्काल पार्टी से बाहर कर देना चाहिए था। उन्होंने सुनील जाखड़ द्वारा वर्षों तक चुप्पी साधे रखने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बाबा साहिब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा लिखे संविधान की बार-बार शपथ लेने के बावजूद जाखड़ सच को दबाने के दोषी हैं।
श्री चीमा ने कहा कि 2017 में 'आप' ने 20 सीटें जीतने के बाद विपक्ष में रहते हुए 77 सीटों के साथ सरकार बनाने वाली कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ दलित समाज के युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने वाले स्कॉलरशिप घोटाले तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कैबिनेट मंत्रियों के बच्चों और रिश्तेदारों को नौकरियाँ दिलाने के लिए की जा रही कैबिनेट मीटिंगें भी शामिल थीं।
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