लखनऊ , फरवरी 13 -- उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राज्य सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरते हुए भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, एनकाउंटर नीति और रोजगार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाए।
माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सदन में भ्रष्टाचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई, जबकि आम जनता सबसे अधिक भ्रष्टाचार से ही परेशान है। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के मामले लोकायुक्त के पास लंबित हैं और कई अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज हैं, लेकिन उनकी स्थिति की कोई स्पष्ट जानकारी सदन को नहीं दी गई। उनका कहना था कि यदि लोकायुक्त की सिफारिशें सदन के पटल पर लाई जातीं, तो सदस्य भी उनकी समीक्षा कर सकते थे।
उन्होंने लोकायुक्त के कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उनका कार्यकाल कब तक है। लोकायुक्त आठ वर्षों से पद पर हैं, इस विषय पर सरकार को स्पष्टता लानी चाहिए। कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल के मामलों में पुलिसकर्मियों का नाम आपराधिक घटनाओं में सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि डीजीपी कार्यालय प्रभावी ढंग से काम करता नहीं दिख रहा है और राज्य में कार्यवाहक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि उच्चतम न्यायालय की मंशा के अनुरूप स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की जाए, ताकि अधिकारी बिना किसी दबाव के काम कर सकें। एनकाउंटर की घटनाओं पर भी माता प्रसाद पांडेय ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी का भविष्य बर्बाद करने वाली गलत परंपरा शुरू नहीं होनी चाहिए। यदि आज गलत मिसाल कायम की जाएगी तो आने वाली सरकारें उससे भी आगे बढ़ सकती हैं।
गैंगस्टर कानून में संशोधन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के कार्यकाल में यह अधिनियम लाया गया था और तब भी उन्होंने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि केवल गोली से अपराध खत्म नहीं होगा, बल्कि व्यवस्था में भरोसा पैदा करना जरूरी है।
साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संगठित साइबर गिरोह आम लोगों को घर बैठे निशाना बना रहे हैं, सरकार को इनके खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
रोजगार के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छोटे और कुटीर उद्योगों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि बंद पड़े उद्योगों को फिर से शुरू किया जाए और प्रदेश से बाहर पलायन कर चुके युवाओं को वापस लाने की ठोस नीति बनाई जाए।
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