भोपाल , फरवरी 12 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित आवासीय भूखंड पर संचालित कथित अवैध शराब दुकान के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भोपाल कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने चार सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं तथा चेतावनी दी है कि समयसीमा में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने पर मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

आयोग ने रहवासियों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए पूर्व में जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जांच के निर्देश दिए थे। जांच समिति की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराते हुए शिकायतकर्ताओं ने आयोग को तथ्यों से अवगत कराया, जिसके बाद आयोग ने पुनः जांच प्रारंभ की है।

हाल ही में आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने अरेरा कॉलोनी स्थित संबंधित दुकान का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों ने सार्वजनिक स्थानों पर नशाखोरी, महिलाओं की असुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की शिकायतें रखीं। निरीक्षण के समय आबकारी अधिकारियों से पूछे गए प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर आयोग ने नाराजगी व्यक्त की।

कांग्रेस नेता एवं शिकायतकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि आर्य समाज मंदिर से लगभग 50 मीटर से कम दूरी तथा अनुश्री चिल्ड्रन हॉस्पिटल के समीप शराब दुकान का संचालन आबकारी नीति का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह मामला क्षेत्रीय नागरिकों के मानवाधिकार और सुरक्षा से जुड़ा है।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल नगर निगम के संपत्ति कर अभिलेखों के आधार पर दुकान की वैधता स्वीकार नहीं की जा सकती। कलेक्टर को लीज शर्तों, मास्टर प्लान और भवन अनुमति की शर्तों के आधार पर स्वतंत्र जांच कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भूखंड का व्यावसायिक उपयोग विधिसम्मत है या नहीं। उल्लंघन पाए जाने पर दुकान को स्थानांतरित या बंद करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

आयोग ने 20 मार्च 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है। क्षेत्रीय नागरिकों ने आयोग के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

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