पटना , जनवरी 30 -- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि सुधार जन कल्याण संवाद में मिले परिवादों के विश्लेषण के आधार पर भूमि विवाद मामलों में थाना स्तर पर पुलिस हस्तक्षेप को सीमित करते हुये स्पष्ट दिशा- निर्देश जारी किये हैं, जो एक फरवरी से पूरे राज्य में लागू होंगे।
अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी और प्रधान सचिव सीके अनिल की ओर से जारी संयुक्त पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भूमि विवाद मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाये रखने तक सीमित रहेगी। पुलिस बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के न तो किसी को दखल- कब्जा दिला सकेगी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य या चहारदीवारी करायेगी।
दिशा- निर्देशों के अनुसार, किसी भी भूमि विवाद की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित थाने की स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। इस प्रविष्टि में दोनों पक्षों का नाम- पता, विवाद की प्रकृति (राजस्व, सिविल या आपसी), विवादित भूमि का संपूर्ण विवरण जैसे थाना, खाता, खेसरा, रकबा और भूमि की किस्म, विवाद का संक्षिप्त विवरण और पुलिस की ओर से की गई प्रारंभिक कार्रवाई दर्ज की जायेगी। इसके साथ यह भी उल्लेख करना होगा कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है।
प्रत्येक भूमि विवाद की जानकारी थाना प्रभारी द्वारा अनिवार्य रूप से संबंधित अंचलाधिकारी को लिखित रूप में दी जायेगी। यह सूचना ई- मेल या विभागीय पोर्टल के माध्यम से भी साझा की जा सकेगी, जिससे राजस्व और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
भूमि विवादों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिये सरकार ने प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक अनिवार्य की है। इन बैठकों में मामलों की प्रगति की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जायेगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 22 जुलाई, 2025 को हुई समीक्षा बैठक के निर्देशों के अनुरूप, थाना प्रभारी या उनकी अनुपस्थिति में अतिरिक्त थाना प्रभारी इन बैठकों में भाग लेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व की भांति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107/116 (बीएनएस के समकक्ष) के तहत पुलिस की भूमिका नियमानुसार बनी रहेगी, लेकिन इसके नाम पर भूमि विवादों में अनावश्यक हस्तक्षेप या दुरुपयोग नहीं किया जायेगा।
पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 के अंतर्गत 'सबका सम्मान-जीवन आसान' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये यह व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य राज्य के लगभग 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को भूमि से जुड़े विवादों में पारदर्शी, संवेदनशील और त्वरित न्याय सुनिश्चित कराना है।
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