भीलवाड़ा , मार्च 09 -- राजस्थान में भीलवाड़ा में भक्ति, शक्ति और पारंपरिक ठंडे पकवानों के अनूठे संगम का पर्व 'शीतला सप्तमी एवं अष्टमी' पूरे जिले में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

होली के रंगों की मस्ती के बीच अब भीलवाड़ा की गलियों में 'रांधा-पुआ' की सौंधी महक घुलने लगी है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजन की तिथियां तय की गयी हैं, जहां कहीं मंगलवार को सप्तमी पूजी जाएगी, वहीं भीलवाड़ा शहर बुधवार को पूरी तरह शीतला माता की भक्ति के रंग में रंगेगा।

पर्व की सबसे खास परंपरा 'बासोड़ा' को लेकर घरों में महिलाओं की व्यस्तता चरम पर है। भीलवाड़ा में बुधवार को होने वाली शीतला अष्टमी की पूजा के लिए रसोई घरों में आज से ही विशेष पकवानों की तैयारी शुरू हो गयी है। पारंपरिक व्यंजनों में दही-चावल, ओलिया, मक्का की घाट, राबड़ी और कुरकुरी पकौड़ियों जैसे शीतल भोज्य पदार्थ तैयार किये जा रहे हैं। प्राचीन मान्यता के अनुसार, इस दिन मां शीतला को ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसके सम्मान में घर का चूल्हा नहीं जलाया जाता और परिवार बासी भोजन ही ग्रहण करता है।

जिले के बनेड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शीतला सप्तमी का पर्व मंगलवार को ही मनाया जाएगा, जबकि भीलवाड़ा शहर के प्रमुख मंदिरों में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर माता की आराधना करेंगी और परिवार की सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना करेंगी। पूजन के पश्चात अबीर और गुलाल खेलकर होली के उत्सव का आनंद दोगुना हो जाएगा।

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