पटना, दिसंबर 12 -- मशहूर लेखिका भावना शेखर की दो पुस्तकों, कथा गीत 'सात यशस्वी बालक' और कहानी संग्रह ' मोह मोह के धागे' का लोकार्पण शुक्रवार को शहर के नामचीन साहित्यकारों की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ।

शहूर लेखक और चिंतक शिवदयाल ने इस अवसर पर कहा कि भावना शेखर के गद्य को भी पढ़ते हुए किसी पद्य सा लय महसूस होता है और उनकी सतत सृजनशीलता काबिले तारीफ है।

मशहूर कथाकार हृषिकेश सुलभ ने कहा कि इस पितृसत्तात्मक समाज मे भी किसी स्त्री से बेहतर सृजक ढूंढना मुश्किल है और भावना जी उसी की मिसाल हैं।

प्रख्यात लेखक भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि समाज मे लोपित हो रहे मानवीय मूल्यों के बीच हर अभिभावक को चाहिए कि आज लोकार्पित हुई पुस्तक 'सात यशस्वी बालक' अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दें।

पत्रकार और कवि अनिल विभाकर ने कहा कि आज लोकार्पित हुई पुस्तक 'मोह मोह के धागे की कहानियां' जीवन के हर पहलुओं को छूती हैं।

उल्लेखनीय है कि पुस्तक की लेखिका श्रीमती शेखर तीन दशकों तक एक शिक्षक के रूप में बाल मनोविज्ञान से रुबरु होती रही हैं और इस दौरान उन्होंने समय के साथ बच्चों की मनोवृत्ति में आते हुए निरंतर बदलाव को देखा है। इस बात को महसूस किया है कि कैसे मां की लोरियां धीरे धीरे मोबाइल फोन की स्क्रीन में गुम गयीं। लेखिका महसूस करती हैं कि बच्चों की आदर्श परवरिश में कमी आई है। तभी तो आज बच्चे भले कामयाब दिखते हैं, लेकिन उनमें प्राचीन बाल नायकों श्रवण, ध्रुव,प्रह्लाद, आरूणि, उपमन्यु, भरत और अभिमन्यु के दर्शन नहीं होते हैं। भावना शेखर की पुस्तक 'सात यशस्वी बालक' के नायक यही सात बच्चे हैं।

भावना शेखर कवियित्री के साथ एक मशहूर कथा शिल्पी हैं और समय समय पर उनकी कहानियां देश की नामवर साहित्यिक पत्रिकाओं में छपती रही हैं। उनका कहानी संग्रह 'मोह मोह के धागे' उनकी सोलहवीं प्रकाशित पुस्तक है, जिसकी कहानियां जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को छूती हैं। इस संग्रह की कहानी 'उम्मीद के पांव' बुजुर्गों के सम्मान में आई कमी और उससे उपजी विसंगतियों की ओर इशारा करती है।

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