नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत अपने मजबूत व्यापक आर्थिक आधार, लचीली विकास दर और तेजी से बढ़ते उद्यम के बल पर आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
वित्त मंत्री ने बुधवार को दिल्ली में 'इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है, जहाँ आयात शुल्क प्रतिबंधों और रणनीतिक बाधाओं के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम उभरती और विकसित दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए नई भू-आर्थिक चुनौतियां पेश करते हैं। वित्त मंत्री ने हालांकि कहा कि भारत संवाद और बातचीत के माध्यम से बदलते वैश्विक व्यापार परिवेश के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार को निष्पक्ष और नियम-आधारित बनाते हुए अपने हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता, लेकिन रचनात्मक रूप से बातचीत करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अलगाव के बजाय जुड़ाव में विश्वास करता है और व्यापार में विकृतियों को दूर करने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ काम करना जारी रखेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद, भारत अपनी घरेलू ताकतों का लाभ उठाकर वैश्विक अनिश्चितताओं को अवसरों में बदलने के प्रति आश्वस्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का विकास स्थिर और जन-केंद्रित रहा है, न कि अल्पकालिक नीतिगत उपायों पर निर्भर।
श्रीमती सीतारमण ने कहा, "भारत का लचीलापन ही असली कहानी है।" उन्होंने कहा कि यह लचीलापन दशकों से लगातार बनाया गया है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक भारत ने देश की आकांक्षाओं के अनुसार बदलती वैश्विक और घरेलू स्थितियों के साथ बार-बार खुद को ढाला है।
वित्त मंत्री ने पिछले दस वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत परिवर्तन के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने वित्तीय समावेशन के तेजी से विस्तार का उल्लेख किया, जिसके कारण करोड़ों नागरिक औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में शामिल हुए हैं और बचत, ऋण तथा बीमा तक पहुंच में सुधार हुआ है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि सामाजिक विकास में भी निरंतर प्रयास किए गए हैं, जिसमें बाल देखभाल सहायता, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई नीतियां और बड़े पैमाने पर किफायती आवास की उपलब्धता शामिल है। उन्होंने कहा कि इन उपायों ने आर्थिक भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया है।
वित्त मंत्री ने बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधारों पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल का प्रावधान, राजमार्गों का विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों में सड़क संपर्क में सुधार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन निवेशों ने क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और आर्थिक दक्षता में सुधार करने में मदद की है।
श्रीमती सीतारमण ने बुनियादी और न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने जीवन की गुणवत्ता और कार्यबल की उत्पादकता में सुधार किया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का 'उद्यमशीलता तंत्र' विभिन्न सुधारों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और वित्त तक व्यापक पहुंच के कारण काफी विकसित हुआ है। उन्होंने उल्लेख किया कि नवाचार और उद्यम अब बड़े शहरों से आगे निकलकर छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच रहे हैं।
श्रीमती सीतारमण ने निर्यात को बढ़ावा देने में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि अब ध्यान सीधे उद्यमियों और छोटे व्यवसायों को निर्यात संबंधी सुविधाएं प्रदान करने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण अधिक से अधिक कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भाग लेने की अनुमति देगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि सेवा क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और विकास तथा रोजगार का प्रमुख चालक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वित्त मंत्री ने नवाचार-आधारित विकास के महत्व पर भी जोर देते हुए और स्कूलों में 'अटल टिंकरिंग लैब्स' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो छात्रों के बीच वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को प्रोत्साहित कर रही हैं। उनके अनुसार, भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए तैयार करने के लिए ऐसी पहल आवश्यक हैं।
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