उदयपुर , मई 05 -- प्रसिद्ध कार्डियोलॉजी एवं पारस हेल्थ उदयपुर के विभागाध्यक्ष डॉ अमित खंडेलवाल ने कहा है कि भारत में हृदय सम्बन्धी बीमारियाँ कई पश्चिमी देशों की तुलना में करीब 10 वर्ष पहले हो रही हैं।
डाॅ खंडेलवाल मंगलवार को उदयपुर में जैन सोशल ग्रुप (जेएसजी) "अरहम" के तत्वावधान में आयोजित एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में 30 और 40 वर्ष की उम्र के ज़्यादा लोग हृदय की गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह चिंता की बात है क्योंकि इनमें से कई मामलों को रोका जा सकता है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करना और जीवन शैली में स्वस्थ बदलाव लाना बहुत ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को बीमारी का बाद में इलाज करने के बजाय उसे शुरुआती दौर में ही रोकने पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ानी चाहिए और समय पर देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए।
आर्थोपेडिक देखभाल में हुई प्रगति के बारे में बात करते हुए रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन एवं आर्थोपेडिक्स के सीनियर कंसल्टेंट डॉ आशीष सिंघल ने समय पर देखभाल और तकनीक की भूमिका के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा, "रोबोटिक तकनीक की मदद से ऑर्थोपेडिक देखभाल में काफी सुधार हुआ है। यह डॉक्टरों को इम्प्लांट्स को ज़्यादा सटीक तरीके से लगाने और जोड़ों की अलाइनमेंट को बेहतर बनाने में मदद करती है, जिससे लंबे समय तक बेहतर नतीजे मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ तकनीक ही काफ़ी नहीं है। कई मरीज़ इलाज करवाने में बहुत ज़्यादा देर कर देते हैं, जिससे जोड़ों की समस्याएँ और भी बदतर हो जाती हैं और उनकी चलने की क्षमता कम हो जाती है। जल्दी से बीमारी का पता चलना, इलाज की सही योजना बनाना और मरीज़ों में जागरूकता होना भी बहुत ज़रूरी है। ये चीज़ें जल्दी ठीक होने का समय कम करने में और ज़िंदगी की बेहतर गुणवत्ता पाने में मदद करती हैं।"कार्यशाला में 200 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वस्थ रहने, बीमारियों का जल्द पता लगाने और इलाज़ के नए तरीकों के बारे में जानकारी साझा की।
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