नयी दिल्ली , जनवरी 31 -- ऐतिहासिक लाल किले में स्वतंत्रता दिवस समारोह के साथ शुरु हुए भारत पर्व20 26 के समापन सत्र में शनिवार को इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट(आईएचएम) रांची के स्टॉल पर उस समय अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक मजेदार क्षण देखने को मिला, जब एक ब्राजीलियाई नागरिक ने उस स्टॉल का दौरा किया और झारखंड की समृद्ध पाक कला और सांस्कृतिक विरासत में गहरी रुचि दिखाई।

ऐतिहासिक लाल किला पर यह क्षण तब और मजेदार बन गया जब आईएचएम रांची के छात्रों ने भी अतिथि का हार्दिक स्वागत किया और झारखंडी व्यंजन, पारंपरिक खान-पान की प्रथाओं, स्थानीय सामग्रियों और राज्य की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं का परिचय दिया। उन्होंने भारत पर्व के महत्व को समझाते हुए अतिथि को बताया कि यह एक राष्ट्रीय मंच है और भारत की विविध संस्कृतियों, व्यंजनों और परंपराओं को एक मंच पर एकजुट करता है, विविधता में एकता की भावना और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

इस दौरान आईएचएम रांची का प्रतिनिधित्व करते हुए शेफ हरे कृष्ण चौधरी ने झारखंड पर विशेष जोर देते हुए भारतीय भोजन परंपराओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि कैसे क्षेत्रीय व्यंजन स्थानीय भौगोलिक स्थितियों, जलवायु और जनजातीय विरासत से गहराई से प्रभावित होते हैं, और कैसे झारखंडी व्यंजन भारत की समृद्ध पाक विविधता का अभिन्न अंग है। भारतीय व्यंजनों के वैश्विक महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत पर्व जैसे आयोजन संस्कृति और खान-पान के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने का एक प्रभावी माध्यम है।

ब्राज़ील के अतिथि ने छात्रों और शिक्षकों के आतिथ्य सत्कार, ज्ञान और प्रस्तुति की सराहना की और झारखंडी व्यंजनों की सादगी, स्थायित्व और सांस्कृतिक गहराई की प्रशंसा की। यह संवाद सांस्कृतिक कूटनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण था, जिसने विश्व में भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देने के भारत पर्व के उद्देश्य को सुदृढ़ किया।

भारत पर्व में स्किल स्टूडियो की गतिविधियों के अंतर्गत, शेफ हरे कृष्ण चौधरी ने पारंपरिक झारखंडी व्यंजन ढुस्का को आलू-चने की सब्जी के साथ परोसते हुए एक लाइव पाक कला प्रदर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदर्शन के माध्यम से, झारखंडी व्यंजनों की सादगी, पोषण मूल्य और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बताया और समझाया कि कैसे स्थानीय सामग्रियां और खाना पकाने की पारंपरिक विधियां टिकाऊ और सामुदायिक खाद्य प्रथाओं को दर्शाती हैं।

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