नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- भारत ने बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को हुई हिंसा में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता के पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें 'निराधार' बताया और कहा कि ऐसा कहकर पाकिस्तान अपने आंतरिक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाता है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को 'बेतुके दावे' करने की बजाय अपने लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं, जो उसकी अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की उसकी सामान्य रणनीति के अलावा और कुछ नहीं है। हर बार जब कोई हिंसक घटना होती है, तो ऐसे दावों को दोहराने की बजाय पाकिस्तान को अपने लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। दमन, क्रूरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन का उसका रिकॉर्ड जगजाहिर है।"यह बयान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी द्वारा हमलों में भारत पर शामिल होने का आरोप लगाने के बाद आया है। भारत ने पाकिस्तान के खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड और क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे दमन को उजागर करके पलटवार किया।
गौरतलब है कि शनिवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कम से कम 16 जगहों पर हमले हुए। क्वेटा, ग्वादर, कल्लात, खारान, मस्तुंग, पसनी, दलबांदिन, नोशकी, बुलाइदा, टंप, मच और आसपास के इलाकों में विस्फोट और सशस्त्र हमलों की सूचना मिली।
बलूचिस्तान में हुई हिंसा की जिम्मेदारी शनिवार को बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 'ऑपरेशन हेरोफ फेज दो ' के हिस्से के रूप में ली। बीएलए के अनुसार दस घंटे की अवधि में 14 शहरों में हुए हमलों में सैन्य, प्रशासनिक और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
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