नयी दिल्ली , मार्च 25 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को मंजूरी दे दी है जिसमें कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है।

सरकार का कहना है कि इससे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) और इसके पेरिस समझौते के तहत देश की महत्वाकांक्षा को बढ़ावा और इसके साथ ही सतत विकास और जलवायु न्याय के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार भारत का 2031-35 का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) विकसित भारत की परिकल्पना से प्रेरित है, जो केवल 2047 का लक्ष्य नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल भारत बनाने के लिए वर्तमान में कदम उठाने की प्रतिबद्धता है। भारत के क्रमिक जलवायु लक्ष्य भारत की पिछली प्रतिबद्धताओं पर आधारित हैं, जिनमें से कई को निर्धारित समय से पहले ही अर्जित कर लिया गया है, जो जलवायु कार्रवाई में देश के निरंतर अच्छे प्रदर्शन को दर्शाता है। पांच गुणात्मक लक्ष्यों का उद्देश्य सतत विकास को रोजमर्रा की जिंदगी और शासन प्रणालियों में समाहित करना, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल विकास के मार्गों को बढ़ावा देना और समाज के सभी वर्गों के लिए एक न्यायसंगत और समावेशी परिवर्तन को सक्षम बनाना है।

वर्ष 2005 से 2020 के दौरान हमारी उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी आई है। अब लक्ष्य को बढ़ाकर 2035 तक 47 प्रतिशत कर दिया गया है। संस्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी बढ़ाने के अद्यतन एनडीसी के लक्ष्य की दिशा में ने 52.57 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता (फरवरी 2026) अर्जित कर ली है, जो निर्धारित समय सीमा से पांच साल पहले ही लक्ष्य को पूरा करने के बराबर है। अब लक्ष्य को और बढ़ाकर 2035 तक स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुंचा दिया गया है। वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के एनडीसी लक्ष्य के संबंध में, भारत ने 2021 तक पहले ही 2.29 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के समतुल्य कार्बन सिंक बना लिया है। वनीकरण और इकोसिस्टम बहाली के प्रयास ग्रामीण आजीविका की सहायता करते हुए भारत के कार्बन सिंक लक्ष्यों में योगदान दे रहे हैं।

भारत के जलवायु संबंधी प्रयास "पर्यावरण के लिए जीवनशैली (लाइफ)" के सिद्धांत पर केंद्रित हैं, जो सतत जीवन को एक जन आंदोलन में बदल रहा है और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल वृक्षारोपण को लोक आधारित जलवायु कार्रवाई में परिवर्तित कर रही है। भारत की जलवायु संबंधी निरंतर प्रतिबद्धताओं से युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, जिससे वे हरित परिवर्तन में प्रमुख भागीदार बन सकेंगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान को मंजूरी देना, निम्न कार्बन उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल भविष्य की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो जलवायु कार्रवाई में वैश्विक रूप से अग्रणी देश के रूप में इसकी भूमिका को और सुदृढ़ करता है।

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