अम्मान , दिसंबर 16 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अगले पाँच वर्षों में भारत और जॉर्डन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
प्रधानमंत्री ने महामहिम शाह अब्दुल्ला द्वितीय के साथ अम्मान में इंडिया-जॉर्डन बिज़नेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत जॉर्डन और दुनिया भर के भागीदारों के लिए 'अपार व्यावसायिक अवसर' प्रदान करता है।
श्री मोदी ने कहा, "भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।" उन्होंने कहा कि देश की वृद्धि 'उत्पादकता-संचालित शासन' और 'नवाचार वाली नीतियों' से प्रेरित है।
प्रधानमंत्री ने साझा समृद्धि के लिए नये आर्थिक अवसरों को खोलने और दीर्घकालिक साझेदारी बनाने के लिए दोनों देशों के अपने ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
श्री मोदी ने प्राचीन व्यापार मार्गों का भी उल्लेख किया जो गुजरात को पेट्रा के रास्ते यूरोप से जोड़ते थे। भरूच जैसे भारतीय बंदरगाहों से माल समुद्री मार्गों से अरब सागर के पार जाता था, जिसमें पेट्रा एक प्रमुख व्यापार केंद्र के रूप में कार्य करता था। वहाँ से फिर भूमध्यसागरीय बंदरगाहों और यूरोप की ओर बढ़ता था।
प्रधानमंत्री ने कहा, "एक समय था जब गुजरात से यूरोप तक व्यापार पेट्रा के रास्ते होता था। हमें अपनी भविष्य की समृद्धि के लिए अपने पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।"श्री मोदी ने मजबूत व्यापार-से-व्यापार जुड़ाव का आह्वान करते हुए जॉर्डन की कंपनियों को भारत के साथ साझेदारी करने और इसके '1.4 अरब उपभोक्ता बाजार, मजबूत विनिर्माण आधार और स्थिर, पारदर्शी नीतिगत वातावरण' से लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश मिलकर 'दुनिया के लिए भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला भागीदार' बनने के लिए काम कर सकते हैं।
शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने भी वाणिज्यिक संबंधों के विस्तार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि जॉर्डन के मुक्त व्यापार समझौतों का नेटवर्क भारत की आर्थिक ताकत के साथ मिलकर 'दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और उससे आगे एक आर्थिक गलियारा' बनाने में मदद कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा, सूचना तकनीक, फिनटेक, हेल्थ-टेक और कृषि-टेक में सहयोग के अवसरों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के स्टार्टअप को मिलकर काम करने के लिए आह्वान किया। उन्होंने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में भारत की ताकत और जॉर्डन के रणनीतिक महत्व की ओर भी इशारा किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, जॉर्डन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य कर सकता है।
श्री मोदी ने कृषि, कोल्ड चेन, फूड पार्क, उर्वरक, बुनियादी ढाँचा, ऑटोमोबाइल, हरित परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा,जल पुनर्चक्रण और पर्यटन क्षेत्र को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने महामहिम के नेतृत्व की सराहना की जिनके अधीन जॉर्डन बाजारों और क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक सेतु बन गया है और व्यापार तथा विकास को बढ़ावा दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश सालाना आठ प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि उच्च उत्पादकता, मजबूत शासन और नवाचार-नेतृत्व वाली नीतियों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, "भारत जॉर्डन के हर निवेशक और व्यवसाय के लिए सभी क्षेत्रों में कई अवसर प्रदान कर सकता है।"श्री मोदी ने डिजिटल सहयोग की गुंजाइश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बनाने में भारत का अनुभव जॉर्डन के लिए अत्यधिक मूल्यवान हो सकता है। उन्होंने कहा कि यूपीआई, आधार और डिजीलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म समावेशन और दक्षता के लिए वैश्विक मानक बन गये हैं।
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