नयी दिल्ली , फरवरी 13 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) पहल के तहत दो हजार करोड़ रुपये के बीआईआरएसी-आरडीआई फंड की पहली राष्ट्रीय घोषणा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां इसकी घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछड़ने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ चुका है। यह पहल विज्ञान-आधारित विकास की दिशा में भारत के दृष्टिकोण में निर्णायक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला से उद्योग तक के अंतर को पाटने के लिए यह फंड एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जहां देश में लगभग 50 बायोटेक स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या 11,000 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इसे भारत की नीतिगत गति और नवाचार-समर्थक वातावरण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि 2014 में लगभग आठ अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था अब तेजी से विस्तार करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत को अग्रणी देशों की पंक्ति में ला खड़ा कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूचना प्रौद्योगिकी ने भारत के विकास को नई दिशा दी उसी प्रकार जैव प्रौद्योगिकी देश के अगले औद्योगिक चरण को गति प्रदान करेगी। आने वाली औद्योगिक क्रांति जैव प्रौद्योगिकी नवाचार, उन्नत विनिर्माण और नए युग की उद्यमशीलता से संचालित होगी।

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