नई दिल्ली , मार्च 7 -- भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा है कि इस समय तेज परिवर्तन के दौर से गुजर रहे भारत के लिए विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महिलाओं का अग्रणी भूमिका निभाना तय है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को अनेक निर्भीक और प्रेरणादायी महिलाएं मिली हैं जो नेतृत्व का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। श्री शर्मा अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राजधानी में एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय था- 'अदालतों से बोर्डरूम तक: महिलाएं बन रही हैं सशक्त स्वर, गढ़ रही हैं भारत का समानता आधारित भविष्य।'श्री शर्मा ने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) और सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा, "हमारी संस्कृति में यह गहराई से स्थापित है कि जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ ईश्वर का वास होता है। माँ ही सृष्टि का मूल स्रोत है। महिलाएँ वास्तव में नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए उत्कृष्टता को सामने लाती हैं।"उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता नूपुर शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की मजबूत पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री बनने से पहले भी, जनवरी 2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने महिलाओं की समान या उससे अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया था। 2024 के चुनावों से पहले उन्होंने अपने तीसरे कार्यकाल को महिलाओं को समर्पित करने की घोषणा की, और आज महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में योजनाएँ चलाई जा रही हैं।"अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने विशिष्ट अतिथि के रूप में समावेशन और सोच में बदलाव की आवश्यकता पर प्रभावशाली संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता शारीरिक सीमाओं में नहीं बल्कि समाज की सोच में होती है, और वास्तविक क्षमता को सामने लाने की कुंजी सुगम्यता है।उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों में खेल को बढ़ावा देने के लिए समर्पित पाठ्यक्रम विकसित करने, पैरालंपियन खिलाड़ियों को प्रेरणास्रोत के रूप में अधिक पहचान देने और रूढ़िगत सोच को समाप्त करने का आह्वान किया।
आईएसीसी की क्षेत्रीय परिषद की सदस्य और भसीन एंड कंपनी एडवोकेट्स की सीनियर पार्टनर नीना गुप्ता ने कहा कि आज महिलाएँ सशक्त हैं, लेकिन समाज कई बार उन्हें अभी भी पीछे की पंक्ति में बैठाने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा, "मैंने कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। जो पेशा पहले काफी हद तक पुरुष प्रधान था, आज उसमें असाधारण महिलाएँ नेतृत्व कर रही हैं। ... आज महिलाएँ अदालतों में नेतृत्व कर रही हैं, संस्थानों का संचालन कर रही हैं और नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रही हैं।"सम्मेलन के अध्यक्ष, आईएसीसी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और भसीन एंड कंपनी एडवोकेट्स के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. ललित भसीन ने महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिका में समर्थन के लिए आईएसीसी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
आईएसीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और एसएंडए लॉ ऑफिसेज एलएलपी के काउंसल मनोज के. सिंह ने नेतृत्व से जुड़े अध्ययनों का उल्लेख करते हुए महिलाओं की स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में चिकित्सा , विधि और कुछ अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित