नयी दिल्ली , दिसंबर 26 -- वैश्विक स्तर पर काम करने वाले अमेरिका के निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के एक ताजा अनुमान के अनुसार भारत अगले दो वर्ष तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा और देश की वृद्धि की रफ्तार वैश्विक स्तर पर लगाये जा रहे अनुमानों से बेहतर होगी।

इस प्रतिष्ठित बैंकिंग की शुक्रवार को प्रकाशित मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक (वृहत आर्थिक परिदृश्य) रिपोर्ट के 2026 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वास्तविक (स्थिर कीमत पर) वृद्धि 6.7 प्रतिशत और 2027 में 6.8 प्रतिशत रह सकती है। यह धीमी पड़ रही वैश्विकअर्थव्यवस्था के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ते जुझारूपन और संरचनात्मक शक्ति को दिखाता है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत की वृद्धि के बारे में ये अनुमान अधिकांश विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी ऊपर हैं। भारत से इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद ऐसे समय में है जबकि कड़ी वित्तीय स्थितियों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और लगातार व्यापार बाधाओं के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि धीमी होने के आसार हैं।

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था लगभग 2.8 प्रतिशत की अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन मामूली गति से बढ़ेगी, जो मौजूदा अनुमानों से थोड़ी अधिक है। अनुमान में यह सुधार मुख्य रूप से महंगाई में कमी और वित्त बाजार की स्थिति के धीरे-धीरे सामान्य होने को देखते हुए है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वैश्विक परिदृश्य में भारत निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता के बिना वृद्धि की उच्च दर को बनाए रखने की अपनी क्षमता की दृष्टि से अलग दिखता है। वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव के आगे कमजोर पड़ने वाली कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बिपरीत भारत की वृद्धि दर एक बड़ी सीमा तक घरेलू खपत, सार्वजनिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों से संचालित हो रही है।

रिपोर्ट में उम्मीद जतायी गयी है कि भारत का बड़ा आंतरिक बाजार, बढ़ता घरेलू खर्च और सरकार के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार देश में आर्थिक गतिविधि के लिए मजबूत आधार के रूप में काम करेगा है। इसके अनुसार, 'सार्वजनिक पूंजीगत व्यय भारत के मध्यम अवधि के दृष्टिकोण का एक प्रमुख चालक बना हुआ है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश उत्पादकता में सुधार कर रहा है, बाधाओं को कम कर रहा है और निजी निवेश को आकर्षित कर रहा है।'बैंक का कहना है कि इन प्रयासों से रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षमता का विस्तार और आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा मजबूत होगी।

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में भारत के लिए वैश्व-व्यापार के झटकों में अपेक्षाकृत कम खतरों का भी उल्लेख किया गया है । रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात महत्वपूर्ण कारक जरूर है पर भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू मांग पर निर्भरता वैश्विक व्यापारिक तनाव, संरक्षणवादी नीतियों या विकसित अर्थव्यवस्थाओं में धीमी वृद्धि से उत्पन्न अस्थिरता के खिलाफ गद्दी का काम करती है।

रिपोर्ट के अनुसार 2026 के अंत तक अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है। इससे केंद्रीय बैंक ज़्यादा अनुकूल या निरपेक्ष मौद्रिक नीति बनाए रख सकते हैं जिससे, खासकर भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश और आर्थिक विस्तार के लिए एक अच्छा माहौल बनेगा।

रिपोर्ट में कुछ ऐसे जोखिमों की ओर भी इशारा किया गया है। एक मुख्य चिंता खास कर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादकता बढ़ोतरी- रोज़गार सृजन के बीच की कड़ी में कमजोरी की है। रोजगार सृजन की धीमी गति उपभोक्ता मांग और वैश्विक पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत अनिश्चितताओं की संभावित चुनौतियाँ बनी हुई हैं, हालांकि भारत का घरेलू विकास मॉडल इन जोखिमों से कुछ हद तक सुरक्षा देता है।

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