हैदराबाद , अप्रैल 10 -- केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता अभूतपूर्व गति से विस्तार कर रही है।
श्री जोशी ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के नेट जीरो फोरम के दूसरे संस्करण को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए जोर दिया कि गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा की ओर संक्रमण अब वैकल्पिक नहीं है बल्कि सतत विकास के लिए एक मौलिक आवश्यकता है। देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब अक्षय ऊर्जा क्षमता में विश्व स्तर पर शीर्ष देशों में शामिल है और स्थापित सौर क्षमता में 150 गीगावाट के मील के पत्थर को पार कर गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि अकेले 2025-26 के दौरान, भारत ने स्वच्छ ऊर्जा में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की, जिसमें सौर और पवन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण वृद्धि शामिल है।
श्री जोशी ने कहा कि नीति में सुधारों, बेहतर निष्पादन और सौर उर्जा विस्तार, हरित ऊर्जा कार्यक्रमों और घरेलू विनिर्माण जैसी पहलों ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की गति और पैमाने को बढ़ाया है। इस क्षेत्र में अगले कुछ वर्षों में 50 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिससे स्थिरता और आर्थिक विकास दोनों मजबूत होंगे।
ब्रिटिश उप उच्चायुक्त गैरेथ विन ओवेन ने अपने संबोधन में भारत और ब्रिटेन के बीच जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में गहरे होते सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देश हरित हाइड्रोजन, अपतटीय पवन, बैटरी भंडारण और जलवायु वित्त जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन विजन 2035 ढांचे के तहत निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी जुटाने की कोशिश की जा रही है ताकि नेट जीरो की ओर संक्रमण को तेज किया जा सके।
तेलंगाना के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) नवीन मित्तल ने अपने भाषण में कहा कि भारत की नेट-जीरो यात्रा जलवायु आवश्यकता और विकास का अवसर दोनों है। उन्होंने बताया कि अक्षय ऊर्जा शुल्क में पिछले दशक में भारी गिरावट हुई है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा कई मामलों में पारंपरिक स्रोतों की तुलना में अधिक सस्ती हो गई है।
श्री मित्तल ने बताया कि भारत ने अपने कई अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को समय से पहले पार कर लिया है और 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से अपनी स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत प्राप्त करने के मार्ग पर है। उन्होंने विकास के अगले चरण के लिए पारेषण बुनियादी ढांचे और ऊर्जा भंडारण को प्रमुख फोकस क्षेत्रों के रूप में पहचाना।
श्री मित्तल ने 'इलेक्ट्रिक परिवहन' के महत्व पर भी जोर दिया और उल्लेख किया कि पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव ऊर्जा लागत और उत्सर्जन को काफी कम कर सकता है। उन्होंने जोर दिया कि उद्योगों, कृषि और बुनियादी ढांचे में ऊर्जा दक्षता में सुधार करना समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऊर्जा उपयोग को अनुकूलित करने तथा बर्बादी को कम करने के लिए एआई (एआई)-संचालित समाधानों सहित उन्नत तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
फोरम में केपी ग्रुप के डॉ. फारुक जी पटेल, आईएफसी-विश्व बैंक समूह के राजेश मिगलानी, ग्रीनको ग्रुप के डॉ. पी रामाबाबू, बोदाडा ग्रुप के डॉ. बोदाडा राघवेंद्र राव और गजा इंजीनियरिंग के वी वी रामा राव सहित प्रमुख उद्योग हस्तियों की भागीदारी देखी गई।
वक्ताओं ने सामूहिक रूप से निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर भारत के संक्रमण को तेज करने और देश को सतत विकास में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
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