चेन्नई , दिसंबर 30 -- विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 में उपग्रह आधारित सूचना अर्थव्यवस्था (स्पेस डेटा इकोनॉमी) ने रफ़्तार पकड़ी है और कृषि तथा जलवायु निगरानी से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक इसका उपयोग बढ़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष उपग्रह डेटा का व्यवसाय से लेकर प्रशासन तक व्यापक उपयोग हुआ है।

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) के महानिदेशक सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट ने कहा, "2025 में उपग्रह आधारित सूचना अर्थव्यवस्था को गति मिली, जहाँ 'भू निगरानी उपग्रहों से प्राप्त सूचनाओं' ने कृषि, आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा नियोजन, जलवायु निगरानी और रक्षा अनुप्रयोगों में सहायता की।"महानिदेशक ने पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी समर्थन का हवाला देते हुए कहा, "केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन, स्टार्टअप के लिए 'फंड ऑफ फंड्स', बेहतर ऋण सुरक्षा तंत्र , अटल टिंकरिंग लैब्स का विस्तार और एक समर्पित 'डीपटेक फंड ऑफ फंड्स' जैसी पहलों के माध्यम से नीतिगत समर्थन को और मजबूत किया गया।"सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट ने कहा, "फरवरी में शुरू किए गए इन-स्पेस के 'टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड' ने स्वदेशीकरण और विनिर्माण को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। कई राज्यों ने भी अंतरिक्ष-केंद्रित नीतियों की घोषणा की, जो राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्राथमिकताओं के बीच बढ़ते तालमेल को दर्शाता है।"महानिदेशक के अनुसार, 2025 में महत्वपूर्ण 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भी भारत की विकसित होती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया, "हमने हर मौसम में निगरानी के लिए रीसैट जैसी स्वदेशी उपग्रहों का उपयोग किया, जिसे प्रमुख भारतीय कंपनियों की व्यावसायिक 'सैटेलाइट इमेजरी' द्वारा और मजबूत किया गया।"सुहोरा टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक अमित कुमार ने कहा कि यह वर्ष भारत के 'डाउनस्ट्रीम स्पेस इकोसिस्टम' के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे लॉन्च क्षमता में सुधार हो रहा है और उपग्रहों का विस्तार हो रहा है, इन उपग्रहों से प्राप्त सूचनाओं का अनुप्रयोग भी बढ़ रहा है। इनका विश्लेषण किया जा रहा है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में इनका इस्तेमाल हो रहा है। कृषि और जलवायु निगरानी से लेकर बुनियादी ढांचा योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा तक, उपग्रह डेटा अब व्यवसाय और शासन में मुख्य उपकरण बनता जा रहा है।"एसरी इंडिया के प्रबंध निदेशक अगेंद्र कुमार ने कहा, "2025 में भारत की भू-स्थानिक यात्रा में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसमें भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एक मुख्य डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में उभरा। भू-स्थानिक सूचना के विश्लेषण से संबंधित बाजार का तेजी से विस्तार यह संकेत देता है कि स्थानिक बुद्धिमत्ता (स्पेशियल इंटेलिजेंस) अब शासन, बुनियादी ढांचे के विकास, जलवायु कार्रवाई और उद्यमों के निर्णय लेने में गहराई से समा गई है।"श्री भट्ट ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, वर्तमान में लगभग 9 बिलियन डॉलर है और अब अगले दशक में 44 बिलियन डॉलर की ओर मजबूती से बढ़ रही है। 2025 के दौरान विकास मुख्य रूप से निजी उद्योगों द्वारा संचालित रहा। भारत में निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2025 के दौरान लगभग 15 करोड़ डॉलर जुटाए, जिससे अब तक का कुल निवेश 61.7 करोड़ डॉलर से अधिक हो गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित