नागपुर , अप्रैल 24 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने शुक्रवार को भारत के भविष्य के प्रति दृढ़ विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का 'विश्वगुरु' के रूप में उभरना तय है और नागरिकों से इसके विकास पथ पर संदेह न करने का आग्रह किया।

एक सभा को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने कहा कि विश्व मार्गदर्शक के रूप में भारत का विकास पहले से ही गति में है और लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्र विश्व मंच पर नेतृत्व की भूमिका हासिल करने के मार्ग पर मजबूती से अग्रसर है।

श्री भागवत ने कहा कि भारत के पास इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक आंतरिक शक्ति, गहरी सांस्कृतिक जड़ें और मूल्य प्रणाली मौजूद है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस प्रगति के संकेत विभिन्न क्षेत्रों में पहले से ही दिखाई दे रहे हैं।

देश की विशिष्ट सभ्यतागत विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक पहचान उसे दुनिया को दिशा देने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम बनाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक नेता के रूप में भारत के भविष्य को आकार देने में ये शाश्वत मूल्य केंद्रीय भूमिका निभायेंगे।

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