नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिये अपने वक्तव्य में कहा है कि भारत का सामाजिक न्याय और सामाजिक संरक्षण संवैधानिक गारंटियों पर आधारित हैं और देश के दीर्घकालिक दृष्टिकोण 'विकसित भारत 2047' के अनुरूप हैं।

श्रीमती ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों अमेरिका के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक विकास आयोग (सीएसओसीडी) के 64 वें सत्र में समावेशी और अधिकार-आधारित सामाजिक विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।श्रीमती ठाकुर ने भारत के अधिकार-आधारित और समग्र समाज-केंद्रित सबका साथ-सबका विकास दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने कहा कि प्रयास किये जा रहे हैं कि समन्वित, न्याय संगत और समावेशी नीतियों के माध्यम से सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय को निरंतर आगे बढ़ाया जाये।

उन्होंने "सबका साथ, सबका विकास" के मार्गदर्शक सिद्धांत का उल्लेख किया जिसमें सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी पीछे न छूटे। समन्वित, न्यायसंगत और समावेशी नीतियों के माध्यम से सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने पर श्रीमती ठाकुर ने व्यापकता, समावेशिता और अंतिम सिरे तक वितरण को प्रदर्शित करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय बुनियादी ढांचा और आवासीय शिक्षा के माध्यम से लड़कियों और लड़कों की शिक्षा में समान भागीदारी सुनिश्चित करना, पाइप द्वारा पेयजल, स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा और स्वच्छता सुविधाओं सहित बुनियादी सेवाओं के व्यापक स्तर पर विस्तार से महिलाओं और कमजोर समुदायों को महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि करोड़ों बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया गया है, जिसमें महिलाएं उद्यमिता और ऋण योजनाओं की प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरी हैं। समर्पित हेल्पलाइन और एकीकृत सेवा केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी सुरक्षा और सहायता तंत्र,मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण के व्यापक कार्यक्रम 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच रहे हैं। बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, असंगठित श्रमिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विस्तारित सामाजिक सुरक्षा और लक्षित योजनायें बनायी जा रही हैं। उन्होंने इस मौके पर भारत की सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की भूमिका की चर्चा की।

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