नयी दिल्ली , फ़रवरी 24 -- भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) की निदेशक डॉ. कुसुमिता अरोरा ने कहा कि आईजीएसटीसी भारत और जर्मनी दोनों के शिक्षाविदों और उद्योग जगत को एकजुट करके विभिन्न क्षेत्रों के बीच की बाधाओं को दूर करता है।
भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) ने आज यहाँ "एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन" पर रणनीतिक सम्मेलन 2026 का आयोजन किया। इस अवसर पर आईजीएसटीसी की निदेशक डॉ. कुसुमिता अरोरा ने कहा कि यह सम्मेलन प्रमुख हितधारकों यानी सरकारी क्षेत्र की हस्तियों, संरक्षण विशेषज्ञों, अकादमिक अनुसंधानकर्ताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। आईजीएसटीसी भारत और जर्मनी दोनों के शिक्षाविदों और उद्योग जगत को एकजुट करके विभिन्न क्षेत्रों के बीच की बाधाओं को दूर करता है। यह अनूठा सहयोग सुनिश्चित करता है कि अनुसंधान केवल जर्नलों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे औद्योगिक समाधानों और सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में परिवर्तित हो।
"भारत का जलपुरुष" के रूप में विख्यात डॉ. राजेंद्र सिंह ने सामुदायिक नेतृत्व वाले जल संरक्षण मॉडल और जल संचयन में पारंपरिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने नदियों के जीर्णोद्धार, पारंपरिक जलाशयों के पुनरुद्धार और स्थानीय समुदायों को जल संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए सशक्त बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जल प्रशासन जन-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक स्थिरता न केवल इंजीनियरिंग समाधानों पर बल्कि सामाजिक भागीदारी, व्यवहार परिवर्तन और जल संसाधनों के जमीनी स्वामित्व पर भी निर्भर करती है।
आईआईटी मद्रास की प्रोफेसर लिगी फिलिप ने जल स्थिरता के लिए वैज्ञानिक और प्रणाली-आधारित दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल में उभरते नए रसायनों के कारण होने वाले प्रदूषण के निवारण की तात्कालिकता पर बल दिया।
भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने विज्ञान, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन के क्षेत्र में भारत-जर्मनी की बढ़ती साझेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन एक साझा वैश्विक चुनौती है। इसके लिए उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और नीतिगत ढांचों में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जलवायु अनुकूलन, पर्यावरण प्रौद्योगिकियों और सतत इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में आईजीएसटीसी जैसे मंचों के माध्यम से भारत-जर्मनी सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित