नयी दिल्ली , मार्च 13 -- वैश्विक अनिश्चितताओं की स्थिति के बीच भारत में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध "टूटने के बजाय बड़ी प्रगति" के दौर से गुजर रहे हैं। श्री गोर ने एक 'मीडिया कॉन्क्लेव' में दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग और रणनीतिक समन्वय में हुए महत्वपूर्ण विकासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितता का है लेकिन अमेरिका-भारत साझेदारी इसके विपरीत दिशा में आगे बढ़ रही है।
अमेरिकी राजदूत ने कहा, "दुनिया भर में ये ताकतें संस्थाओं की परीक्षा ले रही हैं, अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं और सरकारों को अनुकूलन की चुनौती दे रही हैं। लेकिन अमेरिका और भारत के संबंधों में हम कुछ अलग देख रहे हैं। टूटने के बजाय हम प्रगति देख रहे हैं।"उन्होंने कहा कि उनके भारत आने के बाद थोड़े समय में ही दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा, "मुझे भारत आए करीब दो महीने हुए हैं और इतने कम समय में ही हमने कई उल्लेखनीय प्रगति देखी है, जो अमेरिका-भारत साझेदारी की मजबूती और गति को दर्शाती है।"श्री गोर ने कहा कि एक बड़ा कदम नए अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की दिशा में हुई प्रगति है, जिसे उन्होंने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए "विन-विन" व्यवस्था बताया।
उन्होंने कहा, "यह समझौता उस सिद्धांत को दर्शाता है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कूटनीति के केंद्र में रखा है-पारस्परिकता। पारस्परिकता का अर्थ है निष्पक्ष व्यापार, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि।"उन्होंने कहा कि यह वार्ता अन्य वैश्विक व्यापार समझौतों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ी। अमेरिकी राजदूत ने कहा, "इस समझौते को संभव बनाने वाले दो प्रमुख नेता राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी हैं। इसके पीछे उनके बीच गहरी और व्यक्तिगत मित्रता भी एक कारण है।"राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत उन्नत तकनीकों के लिए आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण खनिज समझौते के अंतिम चरण के करीब पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हम एक महत्वपूर्ण खनिज समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं, जो उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रणालियों और उभरती तकनीकों के लिए आवश्यक आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करेगा।" उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग पहले ही परिणाम देने लगा है।
उन्होंने कहा, "अमेरिकी कंपनियां और भारतीय प्रतिभा मिलकर भविष्य के उद्योगों का निर्माण कर सकती हैं। यह दोनों देशों के हित में है और हमारे राष्ट्रों की प्रगति और व्यापक भलाई के लिए साथ-साथ काम करने जैसा है।"राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें एलएनजी, परमाणु ऊर्जा और कार्बन कैप्चर जैसी उभरती तकनीकों में अवसर शामिल हैं।
उन्होंने "पैक्स सिलिका" नामक अमेरिकी तकनीकी पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर और एआई आपूर्ति शृंखला के लिए सुरक्षित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।
उन्होंने कहा, "भारत उन पहले देशों में से एक था जिनसे अमेरिका ने संपर्क किया और पैक्स सिलिका में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह भारत पर तकनीकी साझेदार के रूप में हमारे भरोसे को दर्शाता है।"संवाद सत्र के दौरान श्री गोर ने हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद व्यापार समझौते को लेकर उठी अनिश्चितताओं पर भी सवालों का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि यह फैसला व्यापार समझौतों की व्यापक रूपरेखा को प्रभावित नहीं करता।
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने हमारे व्यापार कानूनों के एक बहुत विशिष्ट हिस्से पर फैसला दिया है, लेकिन राष्ट्रपति के पास अभी भी कई अन्य साधन उपलब्ध हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जिन देशों के साथ हमने समझौते किए हैं वे उनका सम्मान करेंगे।"भारत द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भू-राजनीतिक वातावरण बदल गया है।
उन्होंने कहा, "आज हम एक अलग परिस्थिति में हैं। ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने की कोशिश कर रहा है और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है। वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार है।"ईरान से जुड़े संघर्ष पर उन्होंने अमेरिका की स्थिति दोहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते।
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