मस्कट/ नयी दिल्ली , दिसंबर 18 -- भारत और ओमान ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक नये युग की शुरुआत करते हुए गुरुवार को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किये और सरकार ने कहा है कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए खाड़ी के देशों में निर्यात बढ़ाने के नये अवसर प्राप्त होंगे।
वाणिज्य मंत्रालय ने इस समझौके के बारे में गुरुवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ओमान के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और अवसरों के एक नए युग की शुरुआत हुई।
श्री मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की उपस्थिति भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग एवं निवेश संवर्धन मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने मस्कट में हस्ताक्षर किये। यह समझौता खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत की रणनीतिक भागीदारी में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि यह समझौता भारत में वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे के लिए निर्यात के बड़े अवसर खोलेगा। इससे रोजगार सृजन होगा, कारीगरों, महिला नेतृत्व वाले उद्यम और यह लघु एवं मध्यम उद्यम मजबूत होंगे।
समझौता के अनुसार ओमान में आयात होने वाले 98.08 प्रकार की वस्तुओं पर भारत के लिए आयात शुल्क शून्य होगा जिससे वहां भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शून्य शुल्क पर प्रवेश का फायदा होगा है।
पिछले छह महीनों में यह इस तरह का दूसरा बड़ा समझौता है। इससे पहले भारत ने ब्रिटेन के साथ इसी तरह का एक मुक्त व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत ओमान ने सेवा क्षेत्र में 127 उप-क्षेत्रों को भारत के लिए उदार बनाने की पेशकश की है, जिसमें एक व्यापक पैकेज में कंप्यूटर संबंधी सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, ऑडियो विजुअल सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास सेवाएं, शिक्षा सेवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
भारतीय पेशेवरों के लिए सुगम आवागमन के लिए पहली बार ओमान ने मोड चार श्रेणियों में प्रतिबद्धताएं पेश की हैं, जिनमें अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरणकर्ताओं, संविदात्मक सेवा आपूर्तिकर्ताओं, व्यावसायिक आगंतुकों और स्वतंत्र पेशेवरों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली अस्थायी प्रवेश और अस्थायी प्रवास प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। साथ ही , लेखांकन, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा और संबद्ध क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए प्रवेश और प्रवास को सरल बनाया गया है। प्रमुख सेवा क्षेत्रों (मोड 3) में भारतीय कंपनियों के लिए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है। इसमें ओमान की अंशदायी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के कार्यान्वयन पर श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवरेज पर भविष्य में वार्ता का प्रावधान है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस समझौते में पारंपरिक चिकित्सा पर किसी भी देश द्वारा पहली बार की गई प्रतिबद्धता (जो भारत के आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर खोलती है) चिकित्सा मूल्य यात्रा को बढ़ावा देती है और पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में सहयोग को मजबूत करती है। संयुक्त राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए), ईएमए, यूकेएमएएचआरए द्वारा अनुमोदित फार्मास्युटिकल उत्पादों के विपणन प्राधिकरणों की त्वरित प्रक्रिया, जीएमपी निरीक्षण दस्तावेजों की स्वीकृति से भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए समय और लागत में कमी लाएगी।
भारत ने ओमान के लिए अपने यहां आयात होने वाली विभिन्न प्रकार की वस्तुूओं (12556 प्रकार की दरों) में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क कम या सरल करने की पेशकश की है1 इससे ओमान से भारत को होने वाले 94.81 प्रतिशत निर्यात को फायदा होगा। ओमान को निर्यात के लिए महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील उत्पादों के लिए यह पेशकश मुख्य रूप से शुल्क-दर कोटा (टीआरक्यू) आधारित शुल्क उदारीकरण है।
भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील उत्पादों को बिना किसी रियायत की पेशकश किए इसको छूट से अलग श्रेणी में रखा है, जिनमें विशेष रूप से कृषि उत्पाद, (जिनमें डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू उत्पाद शामिल हैं) सोना और चांदी की सिल्लियां, आभूषण; अन्य श्रम-प्रधान उत्पाद जैसे जूते, खेल के सामान; और कई निम्न धातुओं का स्क्रैप शामिल हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत चालक सेवा क्षेत्र को भी व्यापक लाभ प्राप्त होंगे। ओमान का वैश्विक सेवा आयात 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसमें ओमान के वैश्विक आयात में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी 5.31 प्रतिशत है, जो भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए अपार संभावनाओं को दर्शाता है।
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