गांधीनगर , जनवरी 12 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और जर्मनी के बीच उच्च तकनीक के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के विस्तार का आह्वान करते हुए कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता जल्द होने वाला है और इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सहयोग के नये रास्ते खुलने वाले हैं। ।
श्री मोदी ने सोमवार को यहां दोनों देशों की चुनिंदा कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों (सीईओ) की बैठक को संबोधित करते हुए जर्मनी की कंपनियों को विनिर्माण क्षेत्र में भारत के प्रतिभावान मानव संसाधन का पूरा लाभ उठाने का भी आग्रह किया। इस बैठक को भारत की दो दिन की यात्रा पर आये जर्मनी के चांस्लर फ्रेडरिक मर्ज़ ने भी संबोधित किया। जर्मनी यूरोपीय संघ का एक प्रमुख सदस्य है और भारत तथा यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच गयी है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री मंत्री पीयूष गोयल ने ईयू के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत को अंतिम रूप देने के सिलसिले में पिछले सप्ताह ब्रुसेल्स में दो दिन बिताये और महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इस वर्ष गणतंत्र दिवसर के अवसर पर ईयू का शीर्ष नेतृत्व भारत के निमंत्रण पर राजधानी में होगा।
श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'मैं जमीनी कंपनियों से आग्रह करता हूँ कि वे भारत की प्रतिभाओं का पूरा उपयोग करें तथा कौशल, नवाचार तथा औद्योगिक पैमानों को और बढ़ाएं।
श्री मोदी ने कहा कि भारत निरंतर और व्यापक सुधारों के बल पर आज आठ प्रतिशत से अधिक की गति से बढ़ रहा है और विश्व में वृद्धि और उम्मीद का एक प्रतीक बन गया है। देश में हर क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। रक्षा हो या अंतरिक्ष, खनन हो या परमाणु ऊर्जा हर क्षेत्र में औपचारिकताओं के अनुपालन के बोझ को काम किया जा रहा है।
श्री मोदी कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौता जल्द साकार होने वाला है। " यह हमारे व्यापार, निवेश और साझेदारी के लिए नये रास्ते खोलने वाला है। यानी आप के लिए रास्ता क्लीयर (खुला) है।'श्री मोदी ने जर्मनी के प्रिसीजन और नवाचार में लगे उद्योगों को भारत की ' तेज गति और बड़े पैमाने पर ' हो रहे कार्यों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि , ' आप भारत में घरेलू मांग का लाभ पूरा लाभ उठा सकते हैं और बिना किसी बाधा के विश्व बाजार के लिए निर्यात भी कर सकते हैं।'उन्होंने कहा कि भारत सरकार भरोसा देती है कि " भारत जर्मनी के सहयोग अपने सहयोग को पूरे भरोसे और दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ाएगा। आइए हम मिल कर नवाचार, निवेश और वृद्धि में एक दूसरे के भागीदार बने।"श्री मोदी ने उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जर्मनी के साथ भारत-जर्मनी की भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि दोनों देश सेमीकंडक्टर, पावर इलेक्ट्रानिक्स, फिनटेक और फार्मा और क्वांटम कंप्यूटिंग एवं भौतिकी जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र द्विपक्षीय सहयोग के लिए अपार संभावनाओं वाले क्षेत्र है।
श्री मोदी ने कहा कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी और बायोफ्यूल प्रौद्योगिकी जैसे जैसे क्षेत्राें में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत और जर्मनी की भागीदारों को एक सहज जुड़ाव बताते हुए कहा कि यह भागीदारी परस्पर विश्वास पर विकसित हुई है। हर क्षेत्र में दोनों देशों के लिए परस्पर लाभ के अवसर है। दोनों देशों में विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, रसायन और अनुसंधान के संबंध हैं। इसका लाभ द्विपक्षीय व्यापार को मिला हे ओर यह आज 50 अरब डालर के ऊपर पहुंच गया है।
श्री मोदी ने अपने संबोधन में महत्वपूर्ण खनिजों के कारोबार को कुछ देशों द्वारा हथियार के रूप में अपनाये जाने का जिक्र भी किया। प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके इस कथन को भी याद किया कि " काेई सशक्त राष्ट्र वही होता हेै जो आत्मबल आत्म निर्भरताओर जिम्मेदारी के साथ दुनिया से जुड़ता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक संदर्भ में यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने जर्मन उद्योग के शीर्ष नेतृत्व से कहा, 'आज हमारा साझा दायित्व है कि हम मिल कर दुनिया के लिए भरोसेमंद और जुझारू आपूर्ति श्रृंखला का विकास करें ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चांसलर मर्ज़ की एशिया की यह पहली यात्रा है। भारत और जर्मनी अपने संबंधों की प्लेटिनम जुबली और अपनी रणनीतिक भागीदारी की रजत जयंती मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि हमारे रिश्ते में प्लेटिनम की तरह मज़बूती और चांदी की तरह चमक है। श्री मोदी ने कहा , 'हमारे पास हर सेक्टर में आपसी फायदे के मौके हैं। हमारे लघु और मझोले उद्यम और जर्मनी के मिटेल्सलैंड के बीच चल रहा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सहयोग, आईटी और सेवा में तेज़ी से बढ़ता सहयोग, ऑटोमोटिव, एनर्जी, मशीनरी और केमिकल सेक्टर में संयुक्त उद्यम और अनुसंधान में सहयोग , इन क्षेत्रों में सहयोग से नयी नयी प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं।
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