जोधपुर , फरवरी 27 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को कहा कि पहले भारत दुनिया से खाद्यान्न आयात करता था जबकि वर्तमान में विश्व को खाद्यान्न निर्यात कर रहे हैं तथा पिछले एक साल में 300 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन किया गया है।

श्री शेखावत केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर में आज प्राकृतिक खेती और श्री अन्न प्रसंस्करण पर शुरू हुए किसान मेला और कृषि नवाचार भ्रमण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा , "बीते 60-70 के दशक के प्रधानमंत्रियों को आह्वान करना पड़ा था कि देश के लोगों को एक दिन उपवास करना चाहिए, ताकि बाकी लोगों को भोजन मिल सके। वहां से यात्रा प्रारंभ करके हमारे किसानों के पसीने से सींचे गए खेत आज सोना उगल रहे हैं। हम दुनिया के सबसे ज्यादा गेंहू और चावल का उत्पादन करने वाले देश बन गए हैं।"उन्होंने कहा , "आज हम दुनिया का सबसे अधिक मोटा अनाज पैदा करने वाले देश हैं। इतना ही नहीं, हम आज सबसे अधिक गन्ना और चीनी पैदा करने वाले देश हैं। साथ ही, आज हम दुनिया के सबसे ज्यादा दूध और कपास उत्पादन करने वाले देश हैं। हम दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा फल और सब्जी पैदा करने वाले देश हैं। हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े मछली उत्पादन करने वाले देश हैं।"श्री शेखावत ने कहा कि एक समय था, जब विश्व की अर्थव्यवथा का एक चौथाई हिस्सा भारत की धरती से जाता था, लेकिन आज भारत अपने स्वावलंबी अर्थव्यवस्था के मॉडल के आधार पर विश्व का अग्रणी देश बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कालांतर में ब्रिटिश सरकार की नीतियों और परिणामों के चलते हमें उस स्थिति पर आना पड़ा था, जब हमें अपने देश के लोगों का पेट भरने के लिए खाद्यान्न भी दूसरे देशों से आयात करना पड़ा। उस समय के नेताओं को केवल इसीलिए समझौता करना पड़ता था कि वो वहां से खाद्यान्न प्राप्त कर सकें। दलहन, तिलहन और खाने योग्य तेल और कपास का आयात कर सकें, लेकिन किसानों और वैज्ञानिकों ने पिछले दशकों में अद्भुत काम किया है, उसी का परिणाम है कि आज भारत की निरंतर खाद्यान्न क्षमता बढ़ती जा रही है।

उन्होंने काजरी द्वारा किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्यों की सराहना की और कहा कि प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी काजरी को शोध बढ़ाने की आवश्यकता है।

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