लखनऊ , अप्रैल 28 -- योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि योग क्रांति के बाद अब शिक्षा क्रांति की शुरुआत लखनऊ से हो चुकी है और भारतीय शिक्षा बोर्ड इसके केंद्र में है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड से पढ़ने वाला कोई बच्चा आतंकवादी, हिंसक या व्यभिचारी नहीं बनेगा। मंगलवार को लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज परिसर में भारतीय शिक्षा बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, स्वामी रामदेव, भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एनपी सिंह तथा अन्य संतों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि जिस प्रकार योग क्रांति की शुरुआत हुई थी, उसी तरह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शिक्षा क्रांति का नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड आधुनिक और प्राचीन शिक्षा का बेजोड़ संगम है, जो संस्कारवान, चरित्रवान और राष्ट्रनिर्माता नागरिक तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि आज मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण बच्चे डिजिटल एडिक्शन के शिकार हो रहे हैं और संस्कार व संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य बच्चों को भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और मानवीय संस्कृति से जोड़ना है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि इस वर्ष एक लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ा जाएगा, जिसमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश की होगी। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड केवल देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करेगा।
मुख्य अतिथि माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा दिशाहीन होती जा रही है और वह बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति की ओर प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड बच्चों के चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करेगा।
उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार भारतीय शिक्षा बोर्ड को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि जहां स्वामी रामदेव जैसे संत हों, वहां का बोर्ड निश्चित रूप से विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि यह बोर्ड किसी धर्म, पंथ या मजहब का नहीं, बल्कि 150 करोड़ भारतीयों का बोर्ड है। इसका उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय स्थापित करना है।
इस अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह, अवध ओझा, आचार्य स्वदेश, साध्वी देवप्रिया, पुष्कर द्विवेदी, संत आलोक दास सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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