पटना , जनवरी 21 -- प्रवेशकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय विदेश सेवा के छह प्रशिक्षु अधिकारियों ने बुधवार को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का भ्रमण किया।

प्रशिक्षु अधिकारियों ने विभाग के मंत्री सुनील कुमार एवं विभागीय सचिव, डॉ. प्रतिमा से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मंत्री श्री कुमार ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत करते हुए वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका, बदलते विश्व व्यवस्था तथा समसामयिक भू-राजनीतिक विषयों पर संवाद किया। चर्चा के दौरान बिहार से जुड़े प्रवासी भारतीयों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान पर भी विचार-विमर्श किया गया।

मंत्री श्री कुमार ने अधिकारियों को अवगत कराया कि राज्य में तकनीकी शिक्षा को अधिक रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा निरंतर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि डिमांड-ड्रिवन और मार्केट-ड्रिवन पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं अन्य उभरती तकनीकों से संबंधित विषयों को नियमित पाठ्यक्रम में समाहित किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सुदृढ़ हो रही है।

इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी विभाग की विभिन्न पहलों पर अपने विचार साझा किए।इस दौरान विभागीय सचिव ने प्रशिक्षु अधिकारियों को विभाग की भूमिका, कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि राज्य के प्रत्येक जिले में अभियंत्रण महाविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक संस्थान कार्यरत हैं। साथ ही विभाग द्वारा भाषा प्रयोगशालाओं की भी स्थापना कर फ्रेंच, जर्मन एवं जापानी जैसी विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय अवसरों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के लिए बेहतर रूप से तैयार किया जा सके।

प्रस्तुति के दौरान यह भी बताया गया कि विभाग भविष्य में विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग की दिशा में भी कार्य कर रहा है, जिसमें भारतीय दूतावासों एवं उच्चायोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

कार्यक्रम के अंत में मंत्री एवं विभागीय सचिव ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके आगामी राजनयिक दायित्वों के लिए शुभकामनायें दीं।

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