नयी दिल्ली , फरवरी 13 -- भारतीय वायुसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में थाईलैंड की वायु सेना रॉयल थाई वायुसेना के साथ तीन दिन तक एक अभ्यास में हिस्सा लिया जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग सुदृढ़ हुआ और पारस्परिक समझ में वृद्धि हुई। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 9 से 12 फ़रवरी तक हुए इस युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास में द्विपक्षीय सहभागिता पर जोेर दिया गया। अभ्यास में भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान और रॉयल थाई वायुसेना के साब ग्रिपेन जेट ने अपने रण कौशल का प्रदर्शन किया। समुद्री क्षेत्र के उपर वायु सेना के विमानों की विस्तारित दूरी की उड़ानों के लिए आईएल-78 आकाश में ईंधन भरने वाले टैंकरों द्वारा सहायता प्रदान की गई। यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमानों की उन्नत निगरानी एवं कमान क्षमताओं तथा थाई वायु सेना के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन तंत्र के अंतर्गत संचालित किया गया।

अभ्यास में भाग लेने वाली वायु सेना की टुकड़ियां अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के वायु अड्डों से संचालित हुईं, जबकि थाई ग्रिपेन विमान थाईलैंड के वायु अड्डों से संचालित हुए। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय वायु सेना की पहुंच तथा एक मित्र विदेशी देश के साथ अंतःसंचालन क्षमता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। अभ्यास से भाग लेने वाली सेनाओं ने संचालन अनुभव साझा किया और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत होती 'एक्ट ईस्ट' साझेदारी को दर्शाता है, जो अब एयरोस्पेस क्षेत्र तक विस्तारित हो रही है।

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