बारां , दिसम्बर 27 -- ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी को राष्ट्रपति द्वारा भारतीय सेना के तीसरे सर्वोच्च गैलेंट्री अवार्ड वीरचक्र से सम्मानित किये जाने की घोषणा पर शनिवार को उनके पैतृक गांव राजस्थान के बारां जिले के अटरू उपखंड की ग्राम पंचायत कुंजेड में उनका एक भव्य समारोह में नागरिक अभिनंदन किया गया।
इस दौरान ग्रामवासी कैप्टेन पाटनी जुलूस के रूप में कार्यक्रम स्थल पर लाकर साफा बांधकर उन्हें फूलमालाओं से लादा गया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति भवन में अप्रैल में अनिमेष पाटनी को एक भव्य समारोह में वीरचक्र राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा। इससे पहले बारां जिले में उनके पैतृक गांव कुंजैड़ पहुंचने पर ग्रामीणों के साथ युवाओं में भारी उत्साह था। तीन घंटे के समारोह में पूरे गांव में देशभक्ति का माहौल जाग गया। छात्राओं ने देशभक्ति पूर्ण और वंदे मातरम गायन की सामूहिक प्रस्तुति दी। देशभक्ति पूर्ण गीत और कविता के माध्यम से माहौल देशभक्ति से सराबोर रहा।
ग्राम पंचायत सरपंच राजेश कुमारी ने अभिनंदन पत्र भेंट किया। अनिमेष की माताश्री अनिला पाटनी को भी पुष्प गुच्छ भेंट कर एवं शाल ओढ़ाकर ग्राम पंचायत की ओर से सम्मानित किया।
समारोह में ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी ने छात्रों और युवाओं को देश की सेवा में आगे आने के लिए फौज में शामिल होने का आह्वान किया और उन्हें प्रेरित करते हुए कुछ गुर भी बताये।
भारतीय वायु सेना के जांबाज ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी बारां जिले के कुंजैड़ (अटरू) गांव के निवासी हैं। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी एस 400 'ट्रायम्फ' रेजीमेंट जिसके कमांडर अनिमेष पाटनी रहे हैं, जिसने 314 किलोमीटर दूरी पर लक्ष्य को भेदकर विश्व विमानन इतिहास में रिकॉर्ड बुक कराया। अब तकयह दूरी रूस और यूक्रेन युद्ध में केवल 200 किलोमीटर की रही थी। यह पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद करते हुए ऑपरेशन सिंदूर का निर्णायक हमला था।
इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं आदमपुर जाकर ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी को उनके असाधारण साहस, पराक्रम और नेतृत्व को देखते हुए उनको शाबाशी दी थी। वायुसेना प्रमुख मार्शल एपी सिंह ने ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी की उपलब्धि को अब तक की सबसे बड़ी सतह से हवा में मार करने की सफलता बताते हुए भारतीय वायुसेना की तकनीकी श्रेष्ठता और पाटनी की समरिक कुशलता की प्रशंसा की थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनके असाधारण साहस और नेतृत्व के लिए युद्धकालीन सर्वोच्च तीसरे सम्मान 'वीर चक्र' से नवाजे जाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति भवन में यह समारोह अप्रैल में होना है।
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