नयी दिल्ली , जनवरी 11 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा है कि भारतीय भाषाओं को भारत की आत्मा बताते हुए कहा है कि जो लोग अपनी जड़ों से जुड़े होते हैं वे अपनी भाषा में आत्मविश्वास से संवाद करते हैं।

श्री बिरला ने रविवार को यहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के प्रत्येक शब्द में देश की संस्कृति और संस्कार निहित हैं। देश का नागरिक अपनी जड़ों से जुड़ रहे इसलिए प्रवासी भारतीयों को भी आने वाली पीढ़ियों को भारतीय भाषाएं सिखाने की आवश्यकता। उनका कहना था कि आज की सबसे बड़ी चुनौती देश की नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध भाषाओं से जोड़ने की है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद में आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था है और कई सांसद संसद में अपनी मातृभाषा में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि संसद से ही भारतीय भाषाओं का विस्तार हो और लोकतंत्र के मंच पर देश की सभी भाषाओं को सम्मान मिले।

श्री बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई विश्व नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भाषा में संवाद करते हैं और भारतीय भाषाओं में वैश्विक मंचों पर बात रखना देश के लिए गर्व का विषय है।

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