दरभंगा , नवंबर 21 -- बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि पश्चिमी देशों में शिक्षा मात्र सशक्तिकरण का माध्यम है, जबकि भारतीय परंपरा में इसे सशक्तिकरण के साथ मुक्ति का माध्यम भी माना गया है।

राज्यपाल श्री खान ने डॉ० नागेन्द्र झा स्टेडियम में आयोजित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा की प्रक्रिया जीवन पर्यंत चलती रहती है और यदि विद्या प्राप्ति से व्यक्ति में विनम्रता नहीं आती है, तो उसके वास्तविक उद्देश्यों की पूर्ति नही होती है। उन्होंने कहा कि विनम्रता मनुष्य के सामने सैकड़ों बंद पड़े रास्तों को खोलने में सक्षम है। गीता को पढ़ कर और आत्मसात कर लोग माया, मोह आदि बंधनों से मुक्त हो जाते हैं।

कुलाधिपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए कहा कि आज का दिन इन छात्र-छात्राओं, उनके माता-पिता एवं शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिग्री प्राप्ति के बाद सभी एक नयी जिंदगी में प्रवेश करेंगे। उन्होंने कहा कि धर्म आस्था की अभिव्यक्ति का एक बेहतरीन माध्यम है, जो हमें सही-गलत एवं नैतिक-अनैतिक का फर्क बतलाता है। उन्होंने कहा कि गीता के उपदेश मनुष्य का जीवन की अलग अलग गुथियाँ सुलझाने में मार्गदर्शन करते हैं। सफल जीवन जीने का रहस्य गीता में वर्णित है, जिसका अब पश्चिमी देशों के लोग भी अनुकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारी आत्मा नियंत्रित होती है, तब वह मित्र बन जाती है, परंतु जब वह हमारे नियंत्रण में नहीं हो, तो वह हमारा शत्रु बन जाती है।

राज्यपाल ने कहा कि सिर्फ पुस्तकीय शिक्षा से ही हम पूर्ण नहीं हो सकते और जीवन में आगे बढ़ने के लिए व्यावहारिक ज्ञान बहुत जरूरी है। मनुष्य को चहिये कि वह अपनी महत्वाकांक्षाएं पूर्ण करने के लिए मर्यादा की सीमा को न तोड़ें। उन्होंने कहा कि कम ज्ञान होने पर धन, विद्या या कुल आदि मनुष्य में नशे का भाव पैदा करते हैं, परंतु सात्विक प्रवृत्ति वालों में ये आत्मगौरव का भाव उत्पन्न करते हैं। विनम्रता में हम जितना झुकते हैं, दुनिया उतना ही हमें ऊपर उठाती है।

कुलाधिपति ने कहा कि मिथिला ज्ञान एवं आध्यात्मिकता की धरती रही है। यहां जो शास्त्रार्थ हुए हैं, दुनिया उनका रहस्य जानने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दीक्षांत समारोह को छात्रों के जीवन का विशेष दिन बताया। स्वामी विवेकानन्द के कथनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीना चाहिए। इस दीक्षांत समारोह से डिग्रीधारी छात्रों की औपचारिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है, परंतु अर्जित ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाना भी उनका परम दायित्व है।

राज्यपाल श्री खान ने कहा कि तैत्तिरीयोपनिषद् में भी दीक्षांत समारोह का उल्लेख है, जिसकी दीक्षा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का लक्ष्य छात्रों को अच्छा इंसान एवं सुयोग्य नागरिक बनाना है। हमारी शिक्षा प्रणाली भारतीय संस्कृति पर आधारित है जो छात्रों को चरित्रवान बनाने के साथ ही नैतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है।

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