अमृतसर , फरवरी 03 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने गुरुद्वारा शहीद गंज (चाटीविंड चौक) में कुछ व्यक्तियों द्वारा भारतीय करेंसी नोटों पर "ख़ज़ाना बाबा दीप सिंह जी", "शहीद गंज बाबा दीप सिंह जी", "सेवक जत्था इशनान" आदि मोहरें लगाकर धन वितरित किये जाने की लगातार हो रही गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्रो ख्याला ने मंगलवार को कहा कि इस गुरमत-विरोधी कृत्य की जानकारी होने के बावजूद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और श्री अकाल तख़्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा अब तक कोई ठोस संज्ञान न लेना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य गुरमत के नाम-बाणी सिद्धांत, सिख धर्म के मूल तत्वों, गुरबाणी और सिख रहित मर्यादा का सीधा उल्लंघन है और इस खुलेआम चल रही मनमानी प्रवृत्ति को तुरंत रोका जाना चाहिए।
प्रो. ख्याला ने कहा कि सिख धर्म में 'नाम का ख़ज़ाना' गुरबाणी, सिमरन, सेवा और सत्य आचरण के माध्यम से प्राप्त होता है, न कि भारतीय करेंसी नोटों पर मोहर लगाकर उन्हें आशीर्वाद मानकर जेबों या पर्सों में रखने से। ऐसी गतिविधियां संगतों को गुरमत से दूर कर माया-केंद्रित सोच की ओर धकेलने का प्रयास हैं, जो सिखी की आत्मा और सिद्धांतों के साथ सीधा विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि यह और भी गंभीर विषय है कि यह सब कुछ शिरोमणि कमेटी के अधीन चल रहे गुरुद्वारे में हो रहा है और यह मामला शिरोमणि कमेटी तथा श्री अकाल तख़्त साहिब तक पहुंचने के बावजूद न तो जत्थेदार और न ही कमेटी अध्यक्ष द्वारा कोई स्पष्ट और सख़्त रुख अपनाया गया है।
प्रो. ख्याला ने शिरोमणि कमेटी से सवाल किया कि इस गुरमत-विरोधी गतिविधि के लिए कौन ज़िम्मेदार है, यह सब किसकी सहमति या लापरवाही से हो रहा है और अब तक इसे पूरी तरह रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गयी। उन्होंने यह भी आशंका जतायी कि संभव है कुछ संगतें अज्ञानवश या श्रद्धा के प्रवाह में इसे "ख़ज़ाना" समझ रही हों, लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि कहीं यह गुरुघरों की मर्यादा को नुकसान पहुंचाने और सिख धर्म के नाम-सिद्धांत को माया-प्रधान दिशा में मोड़ने की कोई गहरी साज़िश न हो।
प्रो. ख्याला ने शिरोमणि कमेटी और श्री अकाल तख़्त साहिब से मांग की कि इस मामले में तुरंत, स्पष्ट और कठोर कार्रवाई की जाये, इसके लिए ज़िम्मेदारों की पहचान कर उनके विरुद्ध उदाहरणीय कदम उठाये जायें और संगतों को यह स्पष्ट संदेश दिया जाये कि सिख धर्म में मर्यादा से ऊपर कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि शहीद बाबा दीप सिंह जी की शहादत गुरमत की अडिगता, त्याग और सत्य का प्रतीक है, न कि मोहर लगी हुई माया का। शहीदों के नामपर की जा रही मनमानी गतिविधियां असहनीय हैं और पंथ इस विषय पर चुप नहीं रहेगा।
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