चंडीगढ़ , मार्च 10 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विधायक परगट सिंह ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला और कहा कि यह कोई व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि अमेरिका के सामने प्रधानमंत्री का आत्मसमर्पण (सरेंडर) है।

श्री परगट सिंह ने यह भी टिप्पणी की कि देश में "लोकतंत्र का चौथा स्तंभ" इस मुद्दे पर मौन है। उन्होंने विधानसभा में आम आदमी पार्टी सरकार के विधायकों से अपील की कि वे आगे आएं और मिलकर लड़ें ताकि पंजाब और पड़ोसी राज्यों के छोटे किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों, जो पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं, की रक्षा की जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जब राजा के चरित्र में कमजोरी आती है, तो वह पूरे राष्ट्र की कमजोरी बन जाती है।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के कृषि व्यापार के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती। अमेरिका अपने किसानों को लगभग 1.5 लाख करोड़ रूपये की सब्सिडी देता है, जबकि भारतीय किसानों को सब्सिडी के रूप में प्रति परिवार केवल 6,000 रूपये मिलते हैं। उन्होंने कहा, "भारत और अमेरिका की कृषि में बहुत बड़ा अंतर है।" उन्होंने कहा कि यदि आयात शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया, तो भारतीय बाजार खुद को संभाल नहीं पाएगा। उन्होंने जी-20 शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि बड़े देशों को छोटे और विकासशील देशों के बाजारों में प्रवेश कर उन पर हावी नहीं होना चाहिए।

कपास (रुई) पर शुल्क में प्रस्तावित 11 प्रतिशत की कटौती का मुद्दा उठाते हुए परगट सिंह ने कहा कि यदि कपास पर टैरिफ कम किया गया, तो भारतीय और अमेरिकी कपास के बीच कोई मुकाबला नहीं रह जाएगा। अमेरिकी कपास भारतीय बाजार में भर जाएगी, जिससे पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे कृषि-निर्भर राज्यों पर गंभीर असर पड़ेगा।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार लगभग 500 बिलियन डॉलर है, जबकि भारत का व्यापार 40-42 बिलियन डॉलर के करीब है। यदि भारत का वार्षिक व्यापार 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचता है, तो देश की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है, जिससे व्यापार घाटे में भारी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि टैरिफ कम करने से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दबाव बढ़ेगा। चूंकि सरकार ने पर्याप्त एमएसपी प्रदान नहीं किया है और आयात बढ़ेगा, ऐसे में भारत अंततः अपने घरेलू बाजार को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर हो सकता है।

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