जयपुर , मार्च 06 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपनी राजनीतिक विफलताएं छिपाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार राजस्थान जैसे शांत प्रदेश को नफरत की आग में झोंकने के लिए 'विक्षुब्ध क्षेत्र अधिनियम' लेकर आई है। ऐसा विभाजनकारी कानून निंदनीय है।

शुक्रवार को विधानसभा में राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक-2026' ध्वनिमत से पारित होने के बाद श्री गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही। उन्होंने अपने बयान में कहा कि दूसरी ओर हमारी कांग्रेस सरकार द्वारा करोड़ों प्रदेशवासियों को 'स्वास्थ्य का अधिकार' देने के लिए बनाए गए राइट टू हेल्थ कानून को इन्होंने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। लाखों युवाओं और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने वाला देश का पहला 'गिग वर्कर्स एक्ट' भी आज इनके लिए महज रद्दी का टुकड़ा बन गया है। यह भाजपा और कांग्रेस की सोच का अंतर है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मूल मंत्र जनकल्याण का था जबकि भाजपा का मूल मंत्र 'फूट डालो और राज करो' रह गया है। इन्हें न पीड़ित की पीड़ा दिखती है, न गरीब-मजदूर की जरूरत। इनकी नजर में जनकल्याण नहीं, बल्कि केवल समाज को बांटकर सत्ता हथियाना ही एकमात्र राजनीति है। राजस्थान की जागरूक जनता इस संवेदनहीनता को देख रही है। श्री गहलोत ने कहा कि राजस्थान की जनता समय आने पर माकूल जवाब देगी।

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