पीलीभीत , अप्रैल 19 -- उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष एसपी तिवारी ने रविवार को संगठन के जिला स्तरीय अधिवेशन में प्रदेश सरकार पर कर्मचारी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रही है और अब तक कर्मचारियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

पत्रकारों से बातचीत में श्री तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के रिक्त पद नहीं भरे जा रहे हैं, जिससे कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार डाला जा रहा है। एक-एक कर्मचारी को कई जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जबकि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया जा रहा।

श्री तिवारी ने आरोप लगाया कि संगठन के प्रतिनिधियों को सचिवालय जाने अथवा मंत्रियों से मिलने तक में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के बजाय उपेक्षित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों की स्थिति चिंताजनक है। यदि कर्मचारियों का आक्रोश फूटा तो उसे नियंत्रित करना कठिन होगा। उन्होंने नोएडा की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को समय रहते चेतावनी दी गई थी।

प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में कार्य नहीं करता, बल्कि लोकतांत्रिक ढंग से कर्मचारियों के अधिकारों की मांग उठाता है। उन्होंने सरकार से संगठन के साथ वार्ता कर समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

श्री तिवारी ने बताया कि उनका प्रदेशव्यापी भ्रमण जारी है और शीघ्र ही विभिन्न कर्मचारी संगठनों से वार्ता कर नया मोर्चा गठित किया जाएगा। इसके बाद सरकार के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

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