धर्मशाला , फरवरी 07 -- वरिष्ठ भाजपा नेता और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस सरकार पर विधायकों की क्षेत्र विकास निधि और विवेकाधीन अनुदान रोकने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित पर सीधा हमला बताया है।
श्री परमार ने कहा कि विधायक निधि कोई सरकारी "अनुग्रह" नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधान है, जिसका उद्देश्य सड़कों, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल सुविधाओं, सामुदायिक भवनों और आपदा राहत जैसे बुनियादी कार्यों को पूरा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि निधि रोककर सरकार जनता को दंडित कर रही है और विकास के साथ विश्वासघात कर रही है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट का हवाला देने वाली राज्य सरकार सत्ता में आने के बाद कथित रूप से हजारों करोड़ रुपये फिजूल खर्च कर चुकी है। उनके अनुसार, चेयरमैनशिप, कैबिनेट रैंक, वाहन, बंगले और अन्य सुविधाएं बांटी गईं, लेकिन जब निर्वाचित विधायकों की बात आती है तो खाली खजाने का बहाना बनाया जाता है। इसे उन्होंने सरकार का "दोहरा मापदंड" करार दिया।
आरडीजी अनुदान के मुद्दे पर भी परमार ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह अनुदान वित्त आयोग के निर्णय के अनुसार बंद हुआ है, न कि हिमाचल प्रदेश के साथ किसी भेदभाव के कारण। उनके मुताबिक देश के 17 राज्यों को भी अब यह अनुदान नहीं मिल रहा है।
श्री परमार ने राज्य सरकार पर केंद्र विरोधी और विकास विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग मिलने के बावजूद राज्य सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन, केंद्रीय निधियों के समुचित उपयोग और वित्तीय लेखांकन में विफल रही है, और अपनी कमियों का ठीकरा आर्थिक संकट पर फोड़ रही है।
उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण पर आधारित केंद्रीय बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा और ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक निवेश किया गया है, और हिमाचल प्रदेश को भी कर-वितरण व अनुदानों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार विकास को गति देने में असफल रही है।
श्री परमार ने आरोप लगाया कि विधायक निधि रोकना और आरडीजी अनुदान को लेकर भ्रम फैलाना विपक्ष की आवाज दबाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह संदेश दिया जा रहा है कि जो भी सरकार के खिलाफ बोलेगा, उसके क्षेत्र का विकास रोक दिया जाएगा। इसे उन्होंने लोकतंत्र नहीं, बल्कि निरंकुशता बताया।
उन्होंने दावा किया कि निधि न मिलने से स्कूलों की मरम्मत, पेयजल योजनाएं, खेल मैदान, सामुदायिक भवन और आपदा प्रभावित क्षेत्रों के कार्य ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
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