बैतूल , जनवरी 20 -- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की पेयजल योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। 71 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई गढ़ा डेम जल प्रदाय समूह योजना 18 माह में पूरी होनी थी, लेकिन 33 माह बीत जाने के बावजूद 52 गांवों तक पानी नहीं पहुंच सका है।

एल.एन. मालवीय इंफ्रा कंपनी की लचर कार्यप्रणाली को लेकर जल निगम द्वारा अब तक 8 बार कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद काम की गति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। स्थिति यह है कि योजना का अब तक केवल लगभग 48 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। 25 गांवों में पाइपलाइन तक नहीं बिछाई गई है, जबकि इंटरवेल, पंप हाउस और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जैसे महत्वपूर्ण ढांचे अधूरे पड़े हैं। चार गांवों में घर-घर नल योजना भी केवल कागजों में ही दिखाई दे रही है।

ठंड के मौसम में भी ग्रामीणों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है और वे आज भी हैंडपंप व कुओं पर निर्भर हैं। गर्मी शुरू होते ही हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले वर्धा और मेंढ़ा परियोजनाओं में खराब प्रगति के चलते इसी कंपनी के ठेके निरस्त किए जा चुके हैं, और अब गढ़ा जल योजना भी रद्द होने के कगार पर पहुंच गई है।

जल निगम के एजीएम बसंत कुमार बेलवंशी ने स्पष्ट किया है कि यदि मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो ठेका निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तब तक 52 गांवों के लोगों की प्यास कैसे बुझेगी। करोड़ों रुपये खर्च होने और वर्षों के इंतजार के बाद भी नल सूखे पड़े हैं और ग्रामीणों का भरोसा टूटता नजर आ रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित