शिमला , अप्रैल 09 -- हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष राजीव बिंदल ने राज्य सरकार पर आगामी पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण रोस्टर में हेरफेर करके चुनावों को 'हाईजैक' करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

श्री बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि शुरू में स्थानीय निकाय चुनावों में लगभग दो साल की देरी करने के बार-बार प्रयास किए थे और इस मामले को शीर्ष अदालत तक भी ले गई थी।

शीर्ष अदालत द्वारा हालांकि यह निर्देश दिए जाने के बाद कि चुनाव 31 मई से पहले कराए जाने चाहिए, राज्य सरकार ने अब एक ऐसे तरीके का सहारा लिया है जिसे उन्होंने 'हेरफेर का एक नया चरण' करार दिया।

उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण रोस्टर में मनमाने ढंग से और बार-बार बदलाव किया जा रहा है। श्री बिंदल ने आरोप लगाया, "एक दिन एक पंचायत को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित घोषित किया जाता है। अगले दिन उसे अनारक्षित कर दिया जाता है और फिर उसे महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया जाता है। यह कोई चुनावी प्रक्रिया नहीं है बल्कि कांग्रेस द्वारा अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप बनाया गया एक 'उपयुक्तता मॉडल' है।"भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कार्य पंचायती राज अधिनियम की भावना और संविधान के अनुच्छेद 243डी का उल्लंघन हैं, जो स्थानीय निकायों में आरक्षण निर्धारित करने के लिए एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया प्रदान करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोस्टर में बार-बार किए जा रहे बदलावों का उद्देश्य चुनावी परिणामों में हेरफेर करना है।

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