श्रीनगर , अप्रैल 29 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने राजस्व विभाग की भर्ती में पात्रता मानदंड के रूप में उर्दू की अनिवार्यता को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के एक दिन बाद बुधवार को उमर अब्दुल्ला सरकार पर जम्मू-कश्मीर में उर्दू को धीरे-धीरे हाशिये पर धकेलने का आरोप लगाया और इस पर सवाल किये।
सुश्री इल्तिजा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उर्दू का मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की 'सांस्कृतिक और भाषाई पहचान' से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसे कई शृंखलाबद्ध कदम उठाये हैं, जो सामूहिक रूप से उर्दू की संस्थागत उपस्थिति को कमजोर करती है। मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले राजस्व विभाग के नौ जुलाई 2025 को जारी आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि सरकार ने भूमि दस्तावेजों में उर्दू के ऐतिहासिक उपयोग के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड के अंग्रेजी में डिजिटलीकरण को अनिवार्य कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इस कदम से जमीनी स्तर पर विसंगतियां पैदा हुई हैं और उन अधिकारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गयी हैं, जो पारंपरिक रूप से उर्दू रिकॉर्ड पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआरओ-74 के तहत भर्ती नियमों में हालिया संशोधनों ने पटवारी और तहसीलदार जैसे पदों के लिए उर्दू प्रवीणता की आवश्यकता को खत्म कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि 14 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के जरिये किसी भी स्नातक को अनिवार्य उर्दू की जानकारी के बिना इन पदों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गयी है। उन्होंने इसे एक ऐसा कदम बताया, जिससे भाषा से परिचित स्थानीय युवाओं को नुकसान होगा।
उन्होंने सवाल किया, "मैं उमर साहब से पूछना चाहती हूं कि जो महाराजा के समय में नहीं हुआ और जिसे भाजपा ने भी मिटाने की कोशिश नहीं की, वह आप क्यों कर रहे हैं?" उन्होंने अंग्रेजी में रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और नौकरियों के लिए उर्दू की अनिवार्यता हटाने जैसे फैसलों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा , "आप हमारे इतिहास से उर्दू को क्यों मिटा रहे हैं? आप जानते हैं कि उर्दू हमारी संस्कृति का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। क्या आप यह भाजपा के इशारे पर कर रहे हैं? लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2018 से 2024 तक के उन छह वर्षों में जब जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल के अधीन था, तब भाजपा ने भी वे काम नहीं किये जो आज आप मुख्यमंत्री के रूप में कर रहे हैं।"वर्ष 2025 के राज्यसभा चुनाव विवाद पर सवालों का जवाब देते हुए पीडीपी नेता ने अपनी पार्टी पर भाजपा को सीट जीतने में परोक्ष रूप से मदद करने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला का हवाला देते हुए कहा कि पीडीपी ने समर्थन दिया था। उन्होंने पूछा, "स्वयं फारूक अब्दुल्ला साहब ने चुनाव के बाद सार्वजनिक रूप से पीडीपी का शुक्रिया अदा किया था। अगर ऐसा है, तो क्या वे अब कह रहे हैं कि वह गलत थे?"इस मुद्दे पर मंगलवार को पीडीपी के विरोध प्रदर्शन के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने इन आरोपों का जोरदार खंडन किया। मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कहा कि सिस्टम से उर्दू को हटाने के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गयी है और उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए 'लोगों को गुमराह' करने का आरोप लगाया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित