बेंगलुरु , दिसंबर 28 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गांधीवादी विरासत को जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जान-बूझकर आज राजनीतिक सुविधा के लिए महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर करने और विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है।

कांग्रेस स्थापना दिवस समारोह कार्यक्रम में रविवार काे उनका यह बयान हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर लाये गये वीबी जी-राम जी अधिनियम की पृष्ठभूमि में आया है। इसने गांधीवादी मूल्यों को कमतर करने के प्रयासों पर बड़ी बहस छेड़ दी है।

उन्होंने कहा, "जान-बूझकर आज राजनीतिक सुविधा के लिए महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर करने और विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है।"महात्मा गांधी के नाम को हटाने की साजिश के जवाब में कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का एलान किया है, जो नये वीबी जी-राम जी अधिनियम के तहत मुख्य ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा को बदलने की कोशिश कर रहा है।

श्री सिद्धारमैया ने याद दिलाया कि किस प्रकार महात्मा गांधी ने आम लोगों के जीवन और संघर्षों को समझने के लिए देशभर की यात्रा की थी। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता गांधी के अहिंसा, सत्य और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों से आकार दिये गये जन आंदोलन का परिणाम थी, जिसे राजनीतिक रूप से कांग्रेस ने नेतृत्व दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधीजी के बिना एकीकृत और स्वतंत्र भारत का विचार आकार नहीं ले सकता था। इस विवाद का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र कर मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा झूठी समानताएं बनाकर और गांधी विचारधारा के विरोधियों का महिमामंडन कर इतिहास फिर से लिखने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी बातें गांधी जी के प्रति गहरी दुश्मनी को दिखाती हैं और इनका मकसद आजादी के आंदोलन की नैतिक बुनियाद को कमजोर करना है।

श्री सिद्धारमैया ने चेतावनी दी कि गांधी जी की विरासत को विकृत करना सिर्फ कांग्रेस पर ही हमला नहीं है, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक और भारत के बहुलतावादी मूल्यों पर भी हमला है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी पर सवाल उठाने या उन्हें नजरअंदाज करने की बढ़ती प्रवृत्ति, धर्म, भाषा और पहचान पर पनपने वाली बांटने की राजनीति के साथ-साथ चलती है।

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