देहरादून , मार्च 28 -- उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो पूर्व विधायकों सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं के शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होने पर भाजपा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे वर्ष 2027 में कमल खिलने की हैट्रिक का संकेत बताया है।
प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने व्यंग्य करते हुए कांग्रेस को 4 नेताओं की ऐसी पार्टी बताया, जिसके प्रभारी को देवभूमि आना जरूरी नहीं लगता। उन्होंने मंत्रियों के संदर्भ में कांग्रेस के आरोपों पर स्पष्ट किया कि पार्टी में जो आया, वह हमारा कार्यकर्ता है। उसे उसकी क्षमता एवं उपयोगिता के अनुसार संगठन और सरकार में भूमिका दी जाती है। वहीं दायित्वधारियों की नई सूची के भी मुख्यमंत्री के वापस आने के बाद शीघ्र जारी करने की बात कही।
देहरादून में पार्टी मुख्यालय के विस्तारित भवन में पूजन के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में श्री भट्ट ने स्पष्ट किया कि जो भी लोग आज कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उनको तो बहुत पहले ही पार्टी से निकाल दिया गया है। इसलिए वह भाजपा के चेहरे हो ही नहीं सकते। उन्होंने कहा कि भाजपा के अंदर अनुशासन के दायरे में रहना होता है। जो उस अनुशासन के दायरे को तोड़ता है, उसे कठोरता के साथ ना चाहते हुए भी पार्टी से बाहर किया जाता है। अब जो बाहर निकाल दिया गया, वह कहीं और शिफ्ट हो जाता है तो इसमें हमें क्या फर्क पड़ेगा। हां इतना अवश्य है कि कांग्रेस को इस बात पर विचार करना चाहिए था कि उन्हें भाजपा से क्यों निकाला गया है। उन्होंने तंज किया कि हो सकता है जो हमे कमी या गलती लगी, वो कांग्रेस की कार्य संस्कृति में अच्छी हो।
भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस को आईना दिखाया कि उनके पास तो चुनाव लड़ने के लिए कैंडिडेट तक नहीं हैं। वे हमारे निकाले लोगों को चुनाव में आगे बढ़ाना चाहती है। क्योंकि कल तक कांग्रेस कहती थी कि भाजपा के पास लोग नहीं है, वह हमारी पार्टी से नेताओं को ले जा रही है। अब स्वयं कांग्रेस हमारे निकाले हुए लोगों को अपनी पार्टी में शामिल कर चुनाव में उतरना चाहती है। जो 2027 के चुनावों में भाजपा की दो तिहाई सीट पर जीत और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने मंत्रिमंडल में अंदरूनी, बाहरी जैसी सभी चर्चाओं पर विराम लगाते स्पष्ट किया कि हमारी पार्टी के अंदर जो व्यक्ति आ जाता है वह हमारा कार्यकर्ता है। हम उसे फिर किसी भी दूसरे दल से नहीं जानते, पहचानते हैं। हमारा उत्तरदायित्व वैचारिक रूप से उसे स्थापित करना होता है।
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