लखनऊ , दिसंबर 13 -- केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी का नाम उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर लगभग तय माना जा रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुर्मी समाज के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार पंकज चौधरी को पार्टी की गैर-यादव ओबीसी रणनीति का अहम चेहरा माना जा रहा है।

20 नवंबर 1964 को गोरखपुर में जन्मे पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद चुनाव से की थी। उसी वर्ष गोरखपुर से अलग होकर महाराजगंज नया जिला बना, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। वे गोरखपुर के डिप्टी मेयर भी रहे।

पंकज चौधरी पहली बार 1991 में महाराजगंज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 1996, 1998, 2004, 2019 और 2024 में उन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज की। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दें, तो उनका राजनीतिक सफर लगातार सफलता की मिसाल रहा है। पूर्वांचल में उनका प्रभाव कुर्मी ओबीसी सवर्ण सामाजिक समीकरण के तौर पर देखा जाता है।

कुर्मी समुदाय उत्तर प्रदेश में यादवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओबीसी वोटबैंक माना जाता है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 7 से 10 प्रतिशत बताई जाती है। पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड की करीब 40-50 विधानसभा सीटों पर कुर्मी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

हाल के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 33 सीटों का नुकसान हुआ है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी गैर-यादव ओबीसी वोटों को फिर से एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की संभावित घोषणा को इसी रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।

संगठन और रणनीति दोनों में मजबूत माने जाने वाले पंकज चौधरी व्यवसाय से भी जुड़े हैं और राहत रूह ऑयल कंपनी के मालिक हैं। भाजपा में इससे पहले विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह और ओम प्रकाश सिंह तीन कुर्मी नेता प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। यदि पंकज चौधरी के नाम पर मुहर लगती है, तो वे भाजपा के चौथे कुर्मी प्रदेश अध्यक्ष होंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंचायत और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने कुर्मी समाज से आने वाले नेता पर दांव लगाया है। लोकसभा चुनाव में कुर्मी समाज का एक हिस्सा 'पीडीए' के नाम पर समाजवादी पार्टी की ओर गया था। इसे देखते हुए भाजपा नेतृत्व इस सामाजिक आधार को फिर से अपने पक्ष में मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित