भोपाल , फरवरी 20 -- मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने इंदौर में दूषित पेयजल से भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई मौतों को अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और प्रदेश के लिए शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, पारदर्शिता और शासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार सम्मानित इंदौर की छवि को धूमिल किया है। जब पूरे देश में इस घटना को लेकर चर्चा हो रही है, तब प्रदेश सरकार द्वारा तथ्य स्पष्ट रूप से सामने न रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध है।
जयवर्द्धन सिंह ने बताया कि कांग्रेस विधायकों ने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर इस लोक महत्व के विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग की थी, ताकि जिम्मेदारी तय हो और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके, लेकिन इस पर चर्चा का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि नगर निगम इंदौर को दूषित पेयजल संबंधी 45970 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर निराकृत दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या बनी रही। उन्होंने अपने तारांकित प्रश्न क्रमांक 1625 के लिखित उत्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने आधिकारिक रूप से 20 मौतें स्वीकार की हैं, जबकि परिशिष्ट दिनांक 6 फरवरी 2026 में 32 मृतकों के नाम दर्ज हैं। एक ही दस्तावेज में अलग-अलग आंकड़े होना पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि 32 लोगों की मृत्यु हुई है तो केवल 20 परिवारों को ही दो-दो लाख रुपये की सहायता क्यों दी गई, जबकि ऐसी परिस्थितियों में चार लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। शेष परिवारों को राहत न मिलना अमानवीय है।
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